JJP की जींद रैली V/S इनेलो की रोहतक रैली, कौन करेगा वापसी?
जननायक जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर जींद के जुलाना में 6 दिसंबर को हुई रैली को लेकर चौटाला परिवार चर्चाओं में हैं… सियासी विश्लेषकों से लेकर दोनों पार्टियों के कैडर वोटर भी जुलाना रैली की तुलना रोहतक में 25 सितंबर 2025 को हुई इनेलो की रैली से कर रहे हैं। इसकी वजह ये है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला के निधन के बाद दोनों दलों के ये पहले बड़े सियासी शो रहे। जिसमें उनके दोनों बेटे अजय और अभय अपनी सियासी जमीन तलाशते या मजबूत करने की कोशिश में नजर आए। रोहतक में इनेलो ने ताऊ देवीलाल की जंयती पर रैली से राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी, तो वहीं जजपा अपने स्थापना दिवस पर रैली कर अपनी खोई जमीन वापस पाने का प्रयास करते नजर आई…
खास बात ये है कि, दोनों रैलियों में भाजपा और कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही टारगेट पर रहे। मंच पर दोनों की रैलियों में देवीलाल और ओपी चौटाला के होर्डिंग्स-बैनर लगाए गए। इनेलो की रैली में ताऊ देवीलाल और ओपी चौटाला का नाम भाषण में मुख्य वक्ताओं ने लिया, मगर जजपा की रैली में ओपी चौटाला का नाम लेने से परहेज किया गया।
पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने तो एक बार भी अपने दादा ओमप्रकाश चौटाला का नाम संबोधन में नहीं लिया। हालांकि मंच पर बैनर में चौटाला का फोटो जरूर इस्तेमाल किया गया था। इससे पहले इनेलो सुप्रीमो अभय चौटाला जजपा को ओपी चौटाला का नाम और फोटो न इस्तेमाल करने की चेतावनी दी थी।
वहीं, बात अक्टूबर 2018 की करें, तो उस वक्त इनेलो की गोहाना में रैली हुई थी। जहां ओमप्रकाश चौटाला और अभय चौटाला के सामने दुष्यंत चौटाला को अगला मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगे थे। इस पर ओमप्रकाश चौटाला ने अनुशासनहीनता के आरोप में अपने बड़े बेटे अजय चौटाला और उनके 2 बेटों दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से बाहर कर दिया था।
जिसके बाद 2018 में INLD से अलग होकर अजय चौटाला ने जननायक जनता पार्टी बनाई थी। जजपा ने जींद के पांडू पिंडारा में अपनी पहली रैली की थी। इस रैली में अजय चौटाला ने कहा था कि, अभय को आज मैं इनेलो और चश्मा (पार्टी सिंबल) दोनों देता हूं।
ओपी चौटाला के निधन के बाद जजपा और इनेलो की रैलियों से बड़े चेहरे गायब दिखे। इनेलो की रोहतक रैली में दावा किया गया था कि पुराने जनता दल और कभी थर्ड फ्रंट का हिस्सा रहे दलों के बड़े नेता रैली में शामिल होंगे। मगर, रैली शामिल हुए बड़े चेहरों में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर सिंह बादल, तेलंगाना से पूर्व सांसद कविता, लंदन से काउंसलर रोहित अहलावत, जम्मू के डिप्टी CM सुरेंद्र के नाम शामिल थे।
चौकाने वालों में पूर्व मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह की मौजूदगी भी थी, जो कांग्रेस में होते हुई रैली में पहुंचे थे। इससे पहले इनेलो की पुरानी रैलियों में नीतिश कुमार, प्रकाश सिंह बादल, फारूख अब्दुल्ला सहित कई बड़े चेहरे पहुंचते थे।
इसी तरह जजपा की रैली में अजय सिंह चौटाला ही बड़ा चेहरा रहे। पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री रणजीत चौटाला को न्योता दिया गया था, लेकिन वो नहीं आए। इससे पहले दिग्विजय चौटाला ने दावा किया था कि जुलाना रैली में बड़ा सियासी धमाका हो सकता है।
अब एक नजर डालें, इनेलो और जजपा की रैली की समानताओं पर तो वो इस तरह हैं…
इनेलो ने रोहतक में सम्मान दिवस रैली पर डबल मंच बनाया था। इसी तरह जजपा ने भी ऐसा ही किया। मुख्य मंच पर चौटाला परिवार और गेस्ट बैठे, वहीं नीचे के मंच पर पदाधिकारी बैठे थे। नेताओं के भाषण दूर बैठे कार्यकर्ताओं तक स्पष्ट रूप से पहुंचाने के लिए दोनों रैलियों में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई।
वहीं बात करें, वीआईपी और आम लोगों के लिए अलग पार्किंग की…तो इनेलो ने रोहतक वाली रैली में आने वाले वीआईपी मेहमानों के लिए स्टेज के पीछे विशेष पार्किंग बनाई थी, जिससे वे सीधे मंच तक पहुंच सकें। बाहर से आने वाले लोगों की गाड़ियों के लिए अनाज मंडी और पंडाल के पास ओपन पार्किंग का इंतजाम किया गया था। वहीं, जजपा ने भी ऐसा ही किया। हालांकि, जजपा की रैली में पार्किंग को लेकर अव्यवस्था दिखी।
वहीं, बत करें,महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था: तो दोनों की रैलियों के पंडाल में एक हिस्से को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया था। महिलाएं दोनों ही रैलियों में हरी चुनरी पहनकर आई। इनेलो की रैली में शौचालय और पीने के पानी की अलग व्यवस्था दिखी थी, वहीं इससे उलट जजपा की रैली में पानी के लिए लोग जूझते नजर आए।
इसके साथ ही देवीलाल और ओपी चौटाला की फोटो के इस्तेमाल की बात करें. तो: जजपा और इनेलो की रैली में ताऊ देवीलाल और पूर्व सीएम ओपी चौटाला के फोटो बैनर और होर्डिंग्स पर लगाए गए। दोनों ही अपने आप को ताऊ देवीलाल का वारिस दिखाने की कोशिश जनता के सामने करते नजर आए।
ये तो थी दोनों रैलियों की समानताएं….लेकिन, क्या इन रैलियों के बलबूते आने वाले समय में इनेलो और जेजेपी अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में कामयाब होंगी… इस पर सबकी नजर बनी रहेगी…

