JAIPUR: 3 फर्जी डॉक्टर हुए गिरफ्तार, बड़े रैकेट का हुआ पर्दाफाश
राजस्थान में चिकित्सा जगत से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी के मामले का ख़ुलासा हुआ है। पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने फ़र्ज़ी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन प्रमाण पत्र और नेशनल मेडिकल कमीशन रजिस्ट्रेशन रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी देवेंद्र पर अपने साथी डॉ. शुभम और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने पियूष नामक व्यक्ति से ₹16 लाख की मोटी रकम ली और उसे अवैध तरीके से FMGE प्रमाण पत्र और NMC रजिस्ट्रेशन दिलवा दिया।
जांच में पता चला है कि, ये धोखाधड़ी केवल पियूष तक ही सीमित नहीं थी। मुख्य आरोपी डॉ. देवेंद्र सिंह गुर्जर और उसके साथी डॉ. शुभम गुर्जर ने भी खुद के लिए इसी अवैध तरीके का इस्तेमाल किया। इन दोनों ने अपने नाम पर भी फ़र्ज़ी FMGE प्रमाण पत्र बनवाया था, जिससे ये ज़ाहिर होता है कि, ये गिरोह न केवल दूसरों को सुविधा दे रहा था, बल्कि इस अवैध नेटवर्क का उपयोग अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए भी कर रहा था।
फ़र्ज़ी प्रमाण पत्रों की मदद से इन लोगों ने इंटर्नशिप भी पूरी कर ली है…जहां डॉ. पियूष ने करौली मेडिकल कॉलेज से… डॉ. शुभम गुर्जर ने राजीव गांधी अस्पताल, अलवर से… और डॉ. देवेंद्र सिंह गुर्जर ने राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा से इंटर्नशिप पूरी की है….
फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर सरकारी मेडिकल संस्थानों में इंटर्नशिप करने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पेशेवर ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। फ़िलहाल, SOG इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। फ़र्ज़ीवाड़े के इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य सभी संबंधित व्यक्तियों और गिरोह के सदस्यों की तलाश जारी है, ताकि इस धोखाधड़ी की पूरी चेन को तोड़ा जा सके और भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियों को रोका जा सके। ये मामला उन सभी संस्थाओं के लिए एक चेतावनी है जो महत्वपूर्ण प्रमाण पत्रों और रजिस्ट्रेशन की जांच प्रक्रिया में शामिल हैं।

