क्या महाकुंभ में हो रहा है पाखंड का तांडव ?

क्या महाकुंभ में हो रहा है पाखंड का तांडव ?

हिंदुओं की आस्था का प्रतीक महाकुंभ क्या अब केवल पाखंड बन चुका है ये सवाल मेरे जहन में कहीं ना कहीं अवश्य ही घर कर गया है. क्योंकि आज के टाइम में हम जो देख रहे है उसमें कहीं ना कहीं पाखंड भी नजर आने लगता है। आप लोगों ने खुद देखा होगा कि, कहीं महाकुंभ में किसी गरीब लड़की को उसकी इजाजत के बगैर वायरल किया जा रहा है। तो कहीं तप, योग, साधना, ध्यान का भी कोई महत्व नहीं है।

तप, योग, साधना जिनका वाकई हमारे जीवन में अत्याधिक महत्व है। और ये ही वो चीजें है जो व्यक्ति को किसी भी काम को बेहतरीन तरीके से पूरा करवाने के लिए जिम्मेदार बनता है। लेकिन अब जो हमारे समाज में हो रहा है वो काफी निंदनीय है। कई शरारती तत्वों द्वारा इन शक्तियों का मजाक बनाया जा रहा है। देखिए उदाहरण बिल्कुल हमारे सामने है कोई साध्वी की खूबसूरती को उनकी तप, ध्यान और साधना से तुलना कर रहे हैं, तो वहीं कुछ आडंबरी बने मलंग कहते हैं मेरी महादेव से बात होती है। मैं खुद भगवान हूं।

क्या ये हिंदु धर्म का मजाक बनाने का प्रयास है। देखिए मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि, आखिर क्यों हमारे धर्म में पाखंड का ये तांडव हमें दिन-प्रतिदिन बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। हमारे धर्म में तो कभी पाखंड का स्थान नहीं था। लेकिन कहते हैं जीवन में अगर आप कुछ सकारात्मक चीज अपनाते हैं तो एक समय आता ही है जब आपको उसकी नकारात्मक चीजों का भी सामना करना पड़ता है। और परिणाम हम सभी के सामने है।
144 वर्ष बाद आए इस महाकुंभ को कुंभो में महान कहा जा रहा है।

अनेक साधु, अघोरी, नागा साधु महाकुंभ में अपने तप की शक्ति को लेकर पहुंच रहे हैं। महाकुंभ में स्नान कर अपने और जन कल्याण की निरंतर प्रभू से कामना कर रहे हैं। तो ऐसे में क्या इस पाखंड को रोका नहीं जा सकता है। पाखंड फैलाने वाले तो हम ही हैं। अगर हम खुद हमारे अंतर्मन को जागृत कर लेते हैं तो क्या इस पाखंड को हम जड़ से उखाड़ फेंकने में कामयाब नहीं होंगे।

महाकुंभ में हमें जहां देखने को मिल रहा है। अनेकों साधु-संत सनातन धर्म को लेकर भविष्य की रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं। कुछ ने वैराग्य धारण किया है तो कुछ अपना सब कुछ त्याग कर केवल और केवल प्रभू भक्ति में लीन हैं। उनका तप वाकई कठिन है। कठिन तप के बावजूद वो निरंतर प्रयास कर रहे हैं कि, हमारे धर्म में दिन दोगुनी रात चौगुनी प्रगति हो। लेकिन वहीं महाकुंभ में कुछ ढ़ोंगी बाबा भी देखने को मिल रहे हैं।

व्यक्ति अगर सच्चे व अच्छे मन से प्रभू साधना करता है तो उसको जरूरत नहीं है इन आडंबरों में पड़ने की। कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि पाखंड के तांडव को खत्म करना सिर्फ और सिर्फ हमारे हाथों में है, नहीं तो जहां विदेशों में हमारे धर्म को जो मान-सम्मान दिया जाता है. वहीं, हम उसके साथ खिलवाड़ करते नजर आते हैं।

विदेशों में लोग हमारे धर्म के अनुयायी है, और गहरी आस्था रखते हैं सनातन धर्म में लेकिन वहीं यदि हमारे देश में पूछ लिया जाए, तो आधे से ज्यादा धर्म को पाखंड बताते हैं। उसे सुधारने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। तो जल्दी से जागृत हो जाओ और पाखंड के तांडव से मुक्ति पाओं तभी देख पाओगे क्या कुछ नहीं है हमारे धर्म।

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