राजस्थान

राजस्थान में IAS शिखर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ीं! जिस कंपनी से खरीदे 40 विला-कॉटेज, उसी को मिला 115 करोड़ के निवेश पर विशेष पैकेज

Rajasthan IAS Shikhar Agarwal News: राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिवार की संपत्ति खरीद से जुड़ा मामला लगातार चर्चा में है। अब सामने आया है कि जिस कंपनी से उनके परिवार ने अलवर के अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे थे, उसी कंपनी को राज्य सरकार ने 115 करोड़ रुपये के न्यूनतम निवेश वाले होटल-रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज मंजूर किया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विला की रजिस्ट्री और सरकारी पैकेज का आदेश एक ही दिन, 27 मार्च 2026 को जारी हुआ था। इस खुलासे के बाद सरकारी फैसलों की पारदर्शिता और संभावित हितों के टकराव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एक ही दिन विला की रजिस्ट्री और सरकारी पैकेज का आदेश
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के परिवार ने अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे थे। इन संपत्तियों की बिक्री गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड ने की थी।

इसी कंपनी को राजस्थान सरकार की राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS 2019) के तहत होटल और रिसॉर्ट परियोजना के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज दिया गया।

वित्त विभाग ने 27 मार्च 2026 को इस पैकेज से संबंधित आदेश जारी किया था। संयोग से उसी तारीख को शिखर अग्रवाल के परिवार के नाम पर अलवर स्थित 20 विला की रजिस्ट्री भी हुई थी।

इस घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा है, क्योंकि उस समय शिखर अग्रवाल राज्य के उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। निवेश प्रोत्साहन से संबंधित फैसलों में उद्योग विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

115 करोड़ के निवेश पर कंपनी को क्या-क्या लाभ मिले?
वित्त विभाग के आदेश के अनुसार, गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को अलवर की थानागाजी तहसील के गवांड कुंडल गांव में प्रस्तावित होटल-रिसॉर्ट परियोजना के लिए विशेष पैकेज मंजूर किया गया।

इस फैसले का आधार 14 फरवरी 2026 को हुई निवेश बोर्ड की छठी बैठक थी।

कंपनी को स्वीकृत प्रमुख प्रोत्साहन इस प्रकार हैं:
– 10 वर्षों तक जमा राज्य कर की 75 प्रतिशत राशि के बराबर निवेश सब्सिडी।
– 10 वर्षों तक विद्युत शुल्क में 100 प्रतिशत छूट।
– RIPS 2019 के तहत अन्य पात्र प्रोत्साहन।
– परियोजना में न्यूनतम 115 करोड़ रुपये निवेश की शर्त।
– कुल 241 रोजगार सृजित करने का प्रस्ताव, जिनमें 202 प्रत्यक्ष और 39 अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।

सरकारी आदेश में यह भी प्रावधान है कि निर्धारित निवेश और रोजगार संबंधी शर्तें पूरी नहीं होने पर प्रोत्साहन राशि ब्याज सहित वापस ली जा सकती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि 115 करोड़ रुपये कंपनी की प्रस्तावित न्यूनतम निवेश राशि है, न कि सरकार द्वारा कंपनी को सीधे दी गई 115 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।

ढाई साल में खरीदे 40 विला-कॉटेज, कीमत 6.16 करोड़ रुपये
शिखर अग्रवाल और उनके परिवार की संपत्ति खरीद का मामला केवल अलवर तक सीमित नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2023 में परिवार ने उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज खरीदे थे। इसके बाद मार्च 2026 में अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में 20 विला की खरीद की गई।

इस तरह लगभग ढाई साल के दौरान परिवार ने कुल 40 विला और कॉटेज खरीदे।

इन संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है।

संपत्तियां शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस अधिकारी पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदी गईं।

जिस कंपनी से खरीदी संपत्ति, उसी को वापस लीज पर दी
इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू संपत्तियों को लीज पर देने से जुड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने जिन 40 विला-कॉटेज को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से खरीदा, उन्हें बाद में उसी कंपनी को लीज पर दे दिया।

लीज की शर्तों के मुताबिक, उदयपुर के 20 कॉटेज के लिए प्रति कॉटेज सालाना चार लाख रुपये और अलवर के 20 विला के लिए प्रति विला सालाना पांच लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई।

इस हिसाब से दोनों स्थानों की संपत्तियों से कुल 1 करोड़ 80 लाख रुपये की सालाना लीज राशि बनती है।

इतनी बड़ी खरीद और उसी विक्रेता कंपनी के साथ लीज समझौते ने पूरे लेनदेन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन व्यवस्थाओं का होना अपने आप में किसी अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है।

सरकार ने शिखर अग्रवाल को किया APO
संपत्ति खरीद और लीज से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया है।

शिखर अग्रवाल राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। उनके पास उद्योग, एमएसएमई और निवेश से संबंधित विभागों की जिम्मेदारी थी।

इसके अलावा वे रीको और निवेश संवर्धन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्यरत थे।

सरकार के इस प्रशासनिक कदम के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। हालांकि, एपीओ किया जाना अपने आप में किसी अधिकारी के दोषी साबित होने का प्रमाण नहीं है।

संपत्ति विवरण पर भी उठे सवाल, अधिकारी ने दी सफाई
मीडिया रिपोर्टों में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी की ओर से दाखिल अचल संपत्ति विवरण (IPR) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में दाखिल संपत्ति विवरण और परिवार के नाम पर सामने आई संपत्तियों के बीच अंतर को लेकर चर्चा हो रही है।

वहीं, शिखर अग्रवाल ने संपत्तियां खरीदे जाने की पुष्टि करते हुए कहा था कि इनकी जानकारी अचल संपत्ति विवरण और आयकर रिटर्न में दी गई है।

ऐसे में यह जांच का विषय हो सकता है कि संबंधित संपत्तियों का विवरण नियमों के अनुसार दर्ज किया गया था या नहीं।

कांग्रेस ने की स्वतंत्र जांच की मांग
मामले के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने पूरे प्रकरण पर श्वेतपत्र जारी करने की भी मांग उठाई है, ताकि संपत्ति खरीद और सरकारी निवेश प्रोत्साहन से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

दूसरी ओर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि संबंधित अधिकारी दंपती तथ्यों के आधार पर जवाब देने में सक्षम हैं।

इस विवाद के बीच सरकारी प्रोत्साहन पैकेज की स्वीकृति प्रक्रिया और निजी संपत्ति लेनदेन के बीच किसी संभावित संबंध की जांच की मांग तेज हो गई है।

अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कंपनी के साथ वरिष्ठ अधिकारी के परिवार का निजी संपत्ति लेनदेन हुआ, उसी कंपनी को सरकारी निवेश प्रोत्साहन पैकेज मंजूर होने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी।

यह भी महत्वपूर्ण है कि निवेश बोर्ड के फैसले में संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही और क्या संभावित हितों के टकराव से जुड़े नियमों का पालन किया गया।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से किसी अनुचित लाभ या नियम उल्लंघन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और सरकारी निर्णय प्रक्रिया की जांच आवश्यक होगी।

राजस्थान की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।

Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।

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