हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम को हाईकोर्ट से झटकाहरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम को हाईकोर्ट से झटका

हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम को हाईकोर्ट से झटका

 

हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। राज्य के हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से झटका लगा है, क्योंकि अदालत ने उनकी वो अर्जी खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल द्वारा दायर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करने की अपील की थी

जस्टिस अर्चना पुरी ने 21 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी करते हुए साफ कहा कि, चुनाव याचिका में इतने मटेरियल फैक्ट्स और दस्तावेज मौजूद हैं कि, मामले का ट्रायल जारी रखना जरूरी है।

आपको बता दें कि, 2024 के विधानसभा चुनाव में पलवल-84 सीट पर मुकाबला काफी जोरदार रहा था। बीजेपी के उम्मीदवार और मौजूदा मंत्री गौरव गौतम ने भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। गौतम को 1,09,118 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल को 75,513 वोट मिले। चुनाव के बाद दलाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गंभीर आरोप लगाए।

याचिका के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश की गई, धार्मिक आयोजनों का उपयोग वोट प्रभावित करने के लिए हुआ और सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अपील करने वाले वीडियो प्रसारित किए गए। दलाल ने कोर्ट में दावा किया कि, ये चुनाव आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।

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दलाल की ओर से केस की पैरवी हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल और भारत सरकार के ASG मोहन जैन ने की। जैन ने अदालत में कहा कि, चुनाव याचिका के साथ ठोस सबूत, वीडियो क्लिप, स्थान, तिथि और धार्मिक आयोजनों के विवरण सब कुछ पेश किया गया है, जो ये दिखाते हैं कि, चुनाव प्रचार में धर्म का इस्तेमाल किया गया।

जैन का कहना था कि, इतने तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर याचिका को बिना सुनवाई के खारिज करना कानून के खिलाफ होगा

गौरव गौतम की ओर से दायर आवेदन में कहा गया कि, याचिका “अस्पष्ट” और “सामान्य आरोपों” पर आधारित है, कोई ठोस तथ्य नहीं दिए गए, ये कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं है। इसलिए अदालत इसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दे। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

जस्टिस अर्चना पुरी ने कहा कि, याचिका में धार्मिक आयोजनों का उल्लेख है, सोशल मीडिया के वीडियो का जिक्र है, स्थान, तिथि और परिस्थितियों का ठीक तरह से विवरण दिया गया है, इसलिए इसे “अस्पष्ट” या “बिना तथ्य वाली” याचिका नहीं कहा जा सकता।

अदालत ने ये भी कहा कि, नियमित सुनवाई के दौरान ही ये तय होगा कि, वीडियो और दस्तावेजों की प्रामाणिकता कितनी है और उनका साक्ष्य मूल्य क्या है। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि, शब्दों जैसे—सनातन, हिंदुत्व या धार्मिक प्रसंग—का मूल्यांकन केवल आरोप देखकर नहीं किया जा सकता, बल्कि ये निर्धारित करने के लिए ट्रायल जरूरी है कि, इनका नतीजों पर क्या प्रभाव पड़ा।

इस तरह अदालत ने मंत्री गौतम की ओर से दायर डिसमिसल एप्लीकेशन को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

वहीं, करण सिंह दलाल का कहना है कि, उन्हें चुनाव में हार इसलिए मिली, क्योंकि चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक माहौल पैदा कर वोटों को प्रभावित किया गया। दलाल ने कहा कि, अगर धार्मिक अपीलें न होतीं, तो परिणाम अलग होते। अब चूंकि अदालत ने याचिका को ट्रायल के लिए योग्य माना है, इसलिए आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के दावे और सबूतों की विस्तार से जांच होगी।

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