हरियाणा IPS अफ़सर की मौत का मामला
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एडीजीपी वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर, 2025 को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित सरकारी आवास में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उनकी अचानक मौत ने पुलिस विभाग, सरकारी अधिकारियों और समाज में गहरा शोक पैदा कर दिया है।
मृतक अधिकारी की मौत के मामले ने जैसे ही राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का ध्यान खींचा, उन्होंने न्याय की मांग को लेकर सक्रियता दिखाई।
इस संबंध में न्याय संघर्ष मोर्चा ने चंडीगढ़ में 31 सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जिसने रविवार को सेक्टर-20 स्थित गुरु रविदास भवन में महापंचायत आयोजित की।
स महापंचायत में शामिल लोगों ने स्पष्ट रूप से मांग की कि हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर को तुरंत पद से हटाया जाए और उनकी गिरफ्तारी की जाए। इसके साथ ही कमेटी ने हाईकोर्ट के जज से मामले की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग रखी।

महापंचायत में ये फैसला लिया गया कि, सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया जाएगा। अगर इस दौरान डीजीपी को हटाने या गिरफ्तार करने की कार्रवाई नहीं होती है, तो संघर्ष समिति आंदोलन तेज करने के लिए तैयार है। इसमें चंडीगढ़ में सफाई व्यवस्था को पूरी तरह से बाधित करने से लेकर विभिन्न प्रकार के विरोध प्रदर्शन शामिल हैं।
महापंचायत के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने सड़क पर नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि आयोजकों ने साफ किया कि, अभी कोई सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है और जो नारेबाजी हो रही है वे व्यक्तिगत रूप से की जा रही है। पुलिस प्रशासन भी महापंचायत स्थल पर मौजूद रहा और उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में रखा।
महापंचायत में कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद राजकुमार सैनी के एक विवादास्पद बयान पर भी हंगामा हो गया। उन्होंने कहा कि, “हम वाल्मीकि की पूजा करते हैं, वो स्वयं ब्राह्मण थे।” इस बयान के बाद उपस्थित लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। आयोजकों ने तुरंत सभी को शांत रहने और मर्यादा बनाए रखने की अपील की, जिससे स्थिति पर नियंत्रण पाया गया।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष, रिटायर्ड प्रोफेसर जय नारायण ने कहा कि, महापंचायत में निर्णायक रूप से ये तय किया गया कि, हरियाणा सरकार 48 घंटे में डीजीपी शत्रुजीत कपूर को पद से हटाए। इसके बाद पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के बाद कमेटी आगे के कदम तय करेगी, जिसमें चंडीगढ़ में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बंद करने की चेतावनी भी शामिल है।
संघर्ष समिति के सदस्य गुरमिल ने कहा कि, अभी तक परिवार और सरकार के बीच किसी भी मामले में कोई सहमति नहीं बन पाई है। परिवार और दलित संगठनों की एकमात्र मांग है कि, सबसे पहले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। परिवार विशेष रूप से डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एसपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।
31 सदस्यीय कमेटी में कई नामी और प्रभावशाली व्यक्तियों को शामिल किया गया है।
इनमें चौधरी लहरी सिंह, राजेश कालिया, ओपी चोपड़ा, अमित खेरवाल, बृज पाल, रवि गौतम, मुकेश कुमार, ओपी इंदल, प्रोफेसर जय नारायण, गुरमिल सिंल, त्रिलोक चंद, रेशम सिंह, जय भगवान राठी, प्रवीन टांक, सुरेश बेनीवाल, रवि कुंडली, सुरेंसिंहद्र खुडडा, समदेश वैद, गौतम भोरिया, दिनेश वाल्मीकि, एडवोकेट कृती, सुनील बागड़ी, राज कपुर अहलावत, कृष्ण कुमार, करमवीर वौध और डॉ. रीतू शामिल हैं।
महापंचायत से पहले, एडीजीपी पूरन कुमार की पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार के साथ सेक्टर-11 स्थित सरकारी आवास में वरिष्ठ अधिकारी और परिवारजन मौजूद रहे। जिसमें गृह विभाग की सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा और अमनीत के विधायक भाई भी शामिल थे।
लगभग तीन घंटे तक चली बैठक के बाद अमनीत पी कुमार अपने भाई के साथ सेक्टर-24 स्थित सरकारी आवास लौट आईं। इस दौरान चंडीगढ़ की एसएसपी कंवजीत कौर भी मौके पर मौजूद रहीं और परिवार की सुरक्षा एवं सुविधा का ध्यान रखा गया।
महापंचायत में ये भी स्पष्ट किया गया कि, आईपीएस वाई पूरन कुमार की बेटी को हरियाणा सरकार द्वारा डीएसपी बनाने या किसी अन्य पद पर नियुक्त करने के दावे बेबुनियाद हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि, सरकार की ओर से ऐसी अफवाहें फैलाकर जनता और परिवार को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।


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