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हरियाणा कांग्रेस में कलह की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि हाईकमान भी अभी तक  इस मसले को सुलझाने में नाकाम नजर आ रहा है। हांलाकि कोशिश तो खूब हो रही हैं। लेकिन नतीजा अभी दूर तक भी नजर नहीं आ रहा। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल अभी भी लिस्ट को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं। वहीं हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की भी राय जानने के पक्ष में हैं। सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी को अब इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसमें राज्य के वरिष्ठ नेताओं की राय और केंद्रीय पर्यवेक्षकों का फीडबैक शामिल होगा। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी की टीम अब हर जिले से बनाए गए पैनल में शामिल नामों की समीक्षा करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही जिला अध्यक्षों की अंतिम सूची तय की जाएगी। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि इसी महीने के अंत तक हरियाणा कांग्रेस के सभी 32 जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी जाए। लेकिन सूत्रों ने खबर ये भी दी है कि हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जिला अध्यक्षों के लेकर भी लॉबिंग कर रहे हैं। ताकी उनकी पसंद का जिलाध्यक्ष बनाया जा सके। लेकिन राहुल गांधी साफ कह चुके हैं कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में किसी भी तरह की सिफारिश नहीं चलेगी। लेकिन फिर भी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर अंदर खाने में सिफारिश चल रही है।

सिफारिश को लेकर राहुल गांधी ने दी है सख्त चेतावनी

हांलाकि पार्टी के पर्यवेक्षकों ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है। बता दें कि सोमवार को भी दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और बीके हरिप्रसाद ने सबसे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी उदयभान, फिर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, रणदीप सुरजेवाला और दीपेंद्र सिंह हुड्डा से बातचीत की। इन नेताओं ने जिला अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल नामों को लेकर अपना फीडबैक साझा किया।जातिगत समीकरणों को इस पूरी चर्चा में सबसे अधिक महत्व दिया गया। मसलन, किस जिले में जाट, पंजाबी, बनिया, ब्राह्मण, बीसी (पिछड़ा वर्ग) या एससी (अनुसूचित जाति) नेता को मौका दिया जाना चाहिए – इस पर खास फोकस रहा। मंगलवार को केसी वेणुगोपाल की व्यस्तता के कारण बीके हरिप्रसाद ने तीन और नेताओं – कैप्टन अजय सिंह यादव, चिरंजीव राव और हिसार सांसद बृजेंद्र सिंह से मुलाकात कर उनकी राय जानी।सूत्रों का कहना है कि पर्यवेक्षकों ने नेताओं से यह भी कहा कि यदि वे चाहें तो जिला अध्यक्ष पद के लिए मजबूत नाम सुझा सकते हैं, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि ऐसा ही फार्मूला पहले गुजरात में अपनाया गया था, लेकिन वहां सिफारिश करने वाले नेताओं के ही समर्थकों के नाम लिस्ट से बाहर हो गए थे।

राहुल गांधी की कोशिश जातीय संतुलन बरकरार रखा जाए

इस बार राहुल गांधी चाहते हैं कि संगठन में जातीय संतुलन बरकरार रखा जाए। उनकी मंशा है कि कम से कम 16 जिला अध्यक्ष पदों पर एससी और बीसी वर्ग के नेताओं को मौका दिया जाए। चंडीगढ़ और दिल्ली में हुई बैठकों में उन्होंने यह बात साफ तौर पर कही है। यदि यह फार्मूला लागू होता है तो कई बड़े नेताओं के करीबी दावेदारों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।हरियाणा कांग्रेस की जिला स्तर की टीम को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो सकती है। राहुल गांधी के पास पूरी रिपोर्ट पहुंचने के बाद अंतिम निर्णय होगा। देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती के बीच सही संतुलन बना पाती है या फिर एक बार फिर गुटबाजी इसका रास्ता रोक देती है। लेकिन एक बात तय है – हरियाणा कांग्रेस की सियासत में बड़ा बदलाव बहुत नज़दीक है।