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सोनीपत, हरियाणा: इस साल गोवर्धन पूजा महोत्सव ने सोनीपत में विशेष धूमधाम से मनाया गया। अग्रसेन धाम के प्रधान, राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार, हर वर्ष की तरह श्रद्धालुओं ने भगवान गोवर्धन की पूजा की और श्री बांके बिहारी जी के दर्शन किए। इस महोत्सव में सोनीपत के साथ-साथ विभिन्न जिलों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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गोवर्धन महाराज की भव्य प्रतिमा

महोत्सव के दौरान, कुंडली स्थित श्री अग्रसेन धाम में 5100 किलो गाय के गोबर से बने 36 फीट ऊंचे गोवर्धन महाराज की स्थापना की गई। यह प्रतिमा एक ऊंची पहाड़ी पर बनाई गई है और श्रद्धा का प्रतीक है। इसके निर्माण में कारीगरों को 108 घंटे का समय लगा। गोवर्धन महाराज का आलौकिक श्रृंगार किया गया है, और यहां प्रतिदिन आठ प्रकार का भोग अर्पण कर पूजा-अर्चना की जा रही है।

महाआरती और भंडारे का आयोजन

महोत्सव में 31 थालों के साथ महाआरती का आयोजन किया गया। अन्नकूट उत्सव के तहत, शहर के विभिन्न मंदिरों जैसे कि श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर, महावीर कॉलोनी के सिद्धपीठ श्री लक्ष्मीनारायण बालाजी मंदिर, और नरेंद्र नगर में शिव मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन महाराज की विधिविधान से पूजा-अर्चना की और भंडारे में प्रसाद का वितरण किया गया।

धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस महोत्सव के अंतर्गत संकीर्तन भी आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालु एकत्र होकर भजन कीर्तन का आनंद उठाते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है, जो लोगों को एक साथ लाता है। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने गोवर्धन की परिक्रमा की और अपने श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की।

गोवर्धन पूजा का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र देव की मूसलधार बारिश से बचाया था। इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाता है। यह पर्व प्रकृति की पूजा और उसकी सेवा का संदेश देता है, जो कि आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।

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