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हरियाणा में सियासी सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पार्टी ने ऐलान किया है कि 6 जुलाई को प्रदेश के सभी 27 जिलों में नए ज़िला अध्यक्षों की घोषणा कर दी जाएगी। इसके लिए पूरे प्रदेश में तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। इस अहम संगठनात्मक कवायद को अंतिम रूप देने के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली की अगुवाई में पंचकूला स्थित पार्टी मुख्यालय में दो दिनी बैठकें शुरू हो चुकी हैं। इन बैठकों में सभी जिलों के मौजूदा या संभावित जिलाध्यक्षों को बुलाया गया है और नए चेहरों पर मंथन जारी है।

हरियाणा में 6 जुलाई को  सभी जिलों में नए संगठन की घोषणा होगी

गुरुवार को जिन नौ जिलों के पार्टी नेताओं के साथ विचार-विमर्श हुआ, उनमें पंचकूला, अंबाला, करनाल, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत और गोहाना शामिल हैं। जबकि शुक्रवार को शेष 18 जिलों के नेताओं के साथ मीटिंग होगी।बैठकों में संगठन महामंत्री फनेंद्र नाथ शर्मा और प्रदेश महामंत्री डॉ. अर्चना गुप्ता भी मौजूद रहे। पार्टी का मकसद ऐसे चेहरे सामने लाना है जो बूथ लेवल पर सक्रिय हों और मिशन 2024-29 को मजबूती दें।बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने जानकारी दी है कि इन बैठकों के बाद तैयार हुई अंतिम सूची 4 जुलाई को दिल्ली स्थित बीजेपी केंद्रीय कार्यालय को भेजी जाएगी।
इसके बाद 6 जुलाई को एकसाथ सभी जिलों में नए संगठन की घोषणा कर दी जाएगी।

कांग्रेस अब भी असमंजस और देरी का शिकार

संगठनात्मक पुनर्गठन के साथ-साथ 6 जुलाई को ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी हरियाणा से जुड़े एक और बड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। वे कुरुक्षेत्र, झज्जर और सिरसा में बनाए गए नए पार्टी कार्यालयों का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे।इस कार्यक्रम के दौरान वे हरियाणा के बीजेपी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे, ज़मीनी संगठन की रिपोर्ट लेंगे और आगामी चुनावों के लिए दिशा-निर्देश भी दे सकते हैं।बीजेपी जहां संगठात्मक ढांचा दुरुस्त करने में पूरी तरह जुटी है, वहीं हरियाणा कांग्रेस अब भी असमंजस और देरी का शिकार नजर आ रही है।दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हरियाणा कांग्रेस नेताओं को 30 जून तक जिलाध्यक्षों की सूची फाइनल करने का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया था। लेकिन अभी तक वह लिस्ट न तो बन पाई है और न ही पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) ये बता पा रहे हैं कि फाइनल सूची कब आएगी।

संगठन के मोर्चे पर कांग्रेस भी कांग्रेस पिछड़ी

इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कार्यकर्ता लगातार सवाल कर रहे हैं कि ज़मीनी स्तर पर पार्टी आखिर कब सक्रिय होगी।गौर करने वाली बात यह भी है कि हरियाणा में कांग्रेस पिछले 11 सालों से स्थायी संगठन खड़ा नहीं कर पाई है। यानी पिछले एक दशक से पार्टी संगठनात्मक रूप से अधर में लटकी रही है।हालांकि अब पार्टी के आंतरिक सूत्र कह रहे हैं कि जुलाई के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक हरियाणा कांग्रेस अपने जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसके बाद ब्लॉक, विधानसभा और प्रदेश स्तर पर भी बाकी संगठनात्मक नियुक्तियों में तेजी लाई जा सकती है।हरियाणा में आने वाले चुनावों की आहट अब साफ महसूस की जा सकती है। बीजेपी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी है, और संगठन को बूथ स्तर तक दोबारा एक्टिव कर रही है। वहीं कांग्रेस अभी भी नाम तय करने की उलझनों में फंसी हुई है।अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस आखिरी समय में इस रफ्तार को पकड़ पाएगी, या फिर बीजेपी एक बार फिर से संगठन के मोर्चे पर कांग्रेस पर भारी पड़ जाएगी।