DM\CMO: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हटाया CMO का स्टे
कानपुर डीएम-सीएमओ (DM\CMO) विवाद से हम सभी परीचित है मामला कुछ महीनों पहले का है जब डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह सीएमओ (DM\CMO) ऑफिस में जांच पड़ताल के लिए पहुंच गए। और उन्होंने पाया कि बहुत से कर्मचारी और स्वयं सीएमओ (DM\CMO) हरिदत नेमी ऑफिस में नहीं है। इसके बाद उन्होंने सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने की बात कही और उस वेतन को रोका भी गया।
लेकिन अगर आप किसी की कमी को उजागर करते हैं, तो सामने वाला व्यक्ति या तो उसका बदला लेने की सोचता है या फिर वो हर बात पर आपकी काट करनी शुरू कर देता है और ऐसा ही कुछ हुआ इस मामले में भी। सीएमओ और डीएम के बीच इस घटनाक्रम ने खटास ला दी। और डीएम के कहने के बाद भी सीएमओ ने ऑफिस में लापरवाह कर्मचारियों पर कोई एक्शन नहीं लिया।
दोनों के बीच में विवाद काफी चला था। मामले ने तूल पकड़ा जिसके बाद सीएमओ को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन हरि दत्त नेमी इलाहाबाद हाई कोर्ट गए जहां 8 जुलाई को कोर्ट ने उनके निलंबन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हरिदत्त नेमी (DM\CMO) का निलंबन बिना किसी विभागीय जांच के किया गया है।
मामला कुछ शांत हुआ था लेकिन 8 जुलाई को निलंबन पर रोक लगने के बाद सीएमओ साहब आज सुबह सुबह अपने ऑफिस पहुंच गए जहां पर उनकी जगह डां उदयनाथ को सीएमओ नियुक्त किया गया है। अब देखिए सत्ता कुर्सी का लालच तो सबको है.. यहां पूर्व सीएमओ (DM\CMO) हरिदत नेमी ऑफिस आकर सीएमओ की कुर्सी पर बैठ गए और उसके कम से कम आधे घंटे बाद ऑफिस मे वर्तमान सीएमओ पहुंच गए और उन्होंने उनसे उठने को कहा।
लेकिन यहां बाबू भैया सत्ता, कुर्सी का सवाल, सीएमओ उस कुर्सी से नहीं उठे और कहने लगे कि मैं कोर्ट से स्टे लेकर आया हूं मुझे यहां फिर से ज्वाइन करने के आदेश है। अगर आपको कोई दिक्कत है तो आप शासन से बात करें मुझे यही के लिए भेजा गया है क्योंकि मेरा निलंबन कानपुर से ही हुआ था.
वही डॉ. उदयनाथ ने इसकी जानकारी तत्काल अपने सीनियर अधिकारियों को दी। उन्होंने कहा कि मेरे पास अभी कोई ऑर्डर नहीं आया हैं।
बता दें कानपुर डीएम (DM\CMO) जितेंद्र प्रताप सिंह से भिड़ने वाले CMO डॉ. हरी दत्त नेमी को 18 जून को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद डॉ. हरी दत्त नेमी इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकलपीठ ने 8 जुलाई को कोर्ट ने उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। और राज्य सरकार व विपक्षी को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। अब याचिका की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
अब आपको आगे की कहानी बताती हूं 15 अप्रैल, 2025 को डीएम (DM\CMO) ने शासन को एक लेटर लिखा। इसमें कानपुर सीएमओ को हटाने के लिए कहा गया। 5 जून को फिर एके लेटर शासन को भेजा गया। इस बीच सीएमओ भी अपना ट्रांसफर रुकवाने के लिए एक्टिव हो गए।
सीएमओ (DM\CMO) का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें उन्होंने कहा- जेएम फार्मा का बिल पेमेंट होना था, मेरे ऊपर दबाव बनाया गया। फर्म सीबीआई चार्जशीटेड थी। इसकी खामियों को लेकर 125 पेज की रिपोर्ट तैयार की। इसको अधिकारियों के पास भेजा गया। सीनियर फाइनेंस अधिकारी वंदना सिंह ने डीएम को लेटर भी भेजा था। अब मेरे खिलाफ षडयंत्र हो रहा।
यहीं से इस मामले में सियासत शुरू हुई। सीएमओ (DM\CMO) ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से मुलाकात की। कहा कि BJP सांसद, विधायकों के सुझाव मैंने हमेशा माने। मरीजों को अच्छा इलाज दिलाया, फिर भी मेरे ट्रांसफर की संस्तुति की गई है।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को 11 जून को लेटर लिखा कि सीएमओ साहब का व्यवहार आम जनता को लेकर ठीक है। ऐसे में इनका ट्रांसफर रोकने पर विचार किया जा सकता है।
इसके बाद 2 और BJP विधायक सीएमओ (DM\CMO) के सपोर्ट में आ गए। उन्होंने भी डिप्टी सीएम को लेटर भेजे। MLC अरुण पाठक ने 14 जून और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने 15 जून को लेटर लिखा।
BJP में दो फाड़ तब शुरू हुई, जब 16 जून को बिठूर विधानसभा से BJP विधायक अभिजीत सिंह ने सीएमओ (DM\CMO) को भ्रष्टाचारी बताते हुए सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया। फिर BJP विधायक महेश त्रिवेदी ने भी सीएमओ के खिलाफ लेटर लिख दिया।
इसके बाद 14 जून को कानपुर DM ने सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को बाहर कर दिया। सीएमओ का दावा है कि डीएम ने मीटिंग में मुझसे कहा- CMO साहब आप तो AI हो गए थे। लेकिन, आप तो जिंदा हो और यहां बैठे हो।

