Diwali included in UNESCO Intangible Cultural Heritage: दीपावली को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल
भारत के सबसे बड़े और लोकप्रिय सांस्कृतिक उत्सवों में से एक, दीपावली, अब आधिकारिक तौर पर यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल हो गया है। यह ऐतिहासिक घोषणा दिल्ली के लाल किले से की गई, जहाँ यूनेस्को की अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र का आयोजन चल रहा था। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी खुशी व्यक्त की और इसे भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए गर्व का क्षण बताया।
यूनेस्को ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी भारत को बधाई दी और बताया कि दीपावली सहित कई देशों की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपराएं इस सूची में शामिल की गई हैं। दीपावली की इस उपलब्धि के साथ भारत की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। इससे पहले योग, कुंभ मेला, रामलीला, केरल का मुदियेट्टू नृत्य, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गरबा, बौद्ध मंत्र जाप की हिमालयी परंपरा, नवरोज और संक्रांति जैसे महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक इस सूची में शामिल हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर ट्वीट किया कि दीपावली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकाश और धर्म का प्रतीक है, जो मानवता के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बनता है। पीएम ने यह भी उल्लेख किया कि यूनेस्को की सूची में दीपावली का शामिल होना इस पर्व को वैश्विक स्तर पर और अधिक मान्यता और लोकप्रियता देगा। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्श हमें सदा के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।
इस ऐतिहासिक घोषणा पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हजारों साल पुरानी भारतीय सनातन परंपराओं की दिव्यता और सार्वभौमिक महत्व को वैश्विक मंच पर मान्यता मिली है। दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल होना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उत्सव के महत्व का प्रतीक नहीं है, बल्कि दीपावली के प्रकाश, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली केवल एक पारंपरिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक आलोक है जिसने सदियों से मानवता को सत्य, आशा और नैतिकता के पथ पर अग्रसर किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार इस ऐतिहासिक निर्णय का पूरे हर्ष और उत्साह के साथ स्वागत करती है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प का हवाला देते हुए कहा कि दीपावली की इस वैश्विक मान्यता ने इस संकल्प को और भी सशक्त किया है।
दीपावली का त्योहार भारत के प्रत्येक हिस्से में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह प्रकाश, अच्छाई और ज्ञान के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। घरों और मंदिरों को दीपों और रोशनी से सजाया जाता है और लोग अपने परिवार और समाज के लिए मंगलकामनाएं करते हैं। इस पर्व का महत्व केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है।
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में दीपावली का शामिल होना भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता है। यह निर्णय न केवल भारतीय परंपराओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे संरक्षित करने और इसके महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दीपावली की इस वैश्विक मान्यता से न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलेगी, बल्कि यह विश्वभर में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगी। इसके साथ ही यह भारत के पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा।
इस ऐतिहासिक घोषणा को लेकर पूरे देश में खुशी और उत्साह का माहौल है। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से इस उपलब्धि को साझा कर रहे हैं और इसे भारतीय संस्कृति की वैश्विक उपलब्धि बता रहे हैं। स्कूलों, सांस्कृतिक संस्थानों और विभिन्न समुदायों में दीपावली और इसकी परंपराओं के महत्व को समझाने और इसके सांस्कृतिक मूल्य को उजागर करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
दीपावली के वैश्विक स्तर पर सम्मान की यह उपलब्धि भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता को दर्शाती है। यह निर्णय भारतीय परंपराओं, धार्मिक रीतियों और सामाजिक मूल्यों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक है। दीपावली का उत्सव अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए शांति, सद्भाव और प्रकाश का संदेश बन गया है।

