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उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में पढ़ाई का स्तर सुधारने और गरीब छात्रों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार, नगर विकास विभाग द्वारा करीब 324.56 करोड़ रुपये की लागत से 2,700 से ज्यादा स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से 1,780 क्लासरूम पूरी तरह से बनकर शुरू भी हो चुके हैं, जिनमें अब रोजाना सैकड़ों छात्र डिजिटल और इंटरएक्टिव तरीके से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

गरीब बच्चों को भी मिलेगी डिजिटल शिक्षा

राज्य सरकार का मानना है कि देश का भविष्य तभी सशक्त होगा जब शिक्षा आधुनिक होगी और हर बच्चे को समान अवसर मिलेंगे। खासकर शहरी गरीब तबके के बच्चों को अबतक पारंपरिक और संसाधनविहीन पढ़ाई मिल रही थी। स्मार्ट क्लासरूम के ज़रिए अब ऐसे बच्चों को भी वही डिजिटल सुविधा मिल रही है जो किसी बड़े प्राइवेट स्कूल में होती है। यह पहल शिक्षा में समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इन स्मार्ट क्लासरूम्स को पूरी तरह से डिजिटल रूप दिया गया है, जिनमें इंटरएक्टिव डिजिटल बोर्ड, मल्टीमीडिया लर्निंग कंटेंट, हाई-स्पीड इंटरनेट, प्रोजेक्टर और साउंड सिस्टम , समेत कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इस तरह के क्लासरूम से बच्चे सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे तकनीक को समझेंगे, प्रयोगशाला जैसा अनुभव लेंगे और आने वाले डिजिटल युग के लिए पहले से तैयार होंगे।

65% स्मार्ट क्लासरूम का हो रहा संचालन

नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने बताया कि इस योजना के आने के बाद शहरी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति दर और नामांकन में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में 65% स्मार्ट क्लासरूम पूरी तरह से संचालित हो रहे हैं, और इनके सकारात्मक परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं। नगर विकास विभाग का लक्ष्य है कि जल्द ही शेष बचे हुए स्मार्ट क्लासरूम भी पूरी तरह तैयार हों और उनका संचालन शुरू किया जाए। योगी सरकार की यह डिजिटल पहल ना सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव ला रही है, बल्कि गरीब और वंचित तबके के छात्रों के लिए एक नया भविष्य गढ़ रही है। स्मार्ट क्लासरूम अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा का नया चेहरा बनते जा रहे हैं।