उत्तर प्रदेश

DHIRENDRA SHASTRI: इटावा में कथावाचकों के साथ जातिगत हिंसा पर सियासत जारी, अखिलेश यादव ने किया BJP और धीरेंद्र शास्त्री पर बड़ा हमला, संपूर्ण PDA समाज पीड़ितों के साथ: सपा प्रमुख अखिलेश यादव

DHIRENDRA SHASTRI: इटावा में कथावाचकों के साथ जातिगत हिंसा पर सियासत जारी

इटावा जिले के दंदारपुर गांव में कथावाचकों के साथ हुई अमानवीय और अपमानजनक घटना ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर जातिगत विवाद की आग में झोंक दिया है। घटना में कथित तौर पर यादव जाति के दो कथावाचकों- मुकुट मणि यादव और उनके सहयोगी संत सिंह यादव- के साथ कथित तौर पर ऊंची जाति के लोगों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया, उनके बाल जबरन मुंडवा दिए गए और अपमानित किया गया।

ये मामला अब महज एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि जातीय भेदभाव और सामाजिक विभाजन की गहराई को उजागर करने वाला मुद्दा बन चुका है।

इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जोरदार प्रतिक्रिया दी है। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने न सिर्फ इस घटना की निंदा की, बल्कि बड़े कथावाचकों (DHIRENDRA SHASTRI) को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि, आज कुछ कथावाचक ऐसे हो गए हैं, जो कथा के लिए 50 लाख रुपये तक लेते हैं।

उन्होंने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री(DHIRENDRA SHASTRI) का नाम लेते हुए कहा, “किसी की इतनी हैसियत है कि धीरेंद्र शास्त्री(DHIRENDRA SHASTRI) को अपने घर कथा के लिए बुला ले? कोई अंडर टेबल लेता है या नहीं, ये पता करवा लीजिए। कथा वाचने की आज कीमत(DHIRENDRA SHASTRI) हो गई है, ये लोग फ्री में थोड़े ही आते हैं।”

अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को जातिगत न्याय और सामाजिक समानता से जोड़ते हुए कहा कि, संपूर्ण PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज आज इस घटना के खिलाफ आवाज उठा रहा है। उन्होंने कहा कि, यह सिर्फ दो कथावाचकों(DHIRENDRA SHASTRI) की बात नहीं है, यह पूरे समाज के आत्मसम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, यह सरकार सामाजिक न्याय की अवधारणा को कुचलने का काम कर रही है।

इटावा की घटना(DHIRENDRA SHASTRI) पर बात करते हुए अखिलेश ने तीखा व्यंग्य करते हुए कहा, “अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस घटना की जानकारी मिल जाए तो सोचिए क्या होगा? ये लोग कहते हैं कि हम सुबह चार बजे उठते हैं, लेकिन इटावा में रातभर कथावाचकों का अपमान होता रहा और कोई सुनने वाला नहीं था। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं? क्या यही रामराज्य है जिसकी बात बीजेपी करती है?”

घटना से जुड़े एक अन्य पहलू की चर्चा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कलाकारों(DHIRENDRA SHASTRI) का अपमान हमारी सभ्यता का अपमान है। उन्होंने एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट से एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “कुछ गिनती के प्रभुत्ववादी(DHIRENDRA SHASTRI) और वर्चस्ववादी लोगों ने तो उस कलाकार को भी नहीं छोड़ा जो अपनी थाप से दुनिया देखता है।

उसकी ढोलक छीनकर और उस पर आरोप लगाकर, ऐसे नकारात्मक लोगों ने अपने ही समाज की सहानुभूति खो दी है। जो लोग ऐसा करते हैं, वो ‘अभारतीय’ और ‘अमानवीय’ हैं।”

अखिलेश ने सवाल उठाया कि अगर किसी दलित, पिछड़े या अल्पसंख्यक के साथ ऐसा बर्ताव होगा, तो क्या देश में सामाजिक समरसता बची रह पाएगी? क्या भारत की आत्मा को इस तरह कुचला जा सकता है?

सपा प्रमुख ने बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि, सत्ता के मद में चूर लोग सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, बीजेपी के शासन में जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा मिल रहा है और यह घटना उसी मानसिकता की उपज है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और पीड़ितों को न्याय दिलाए।

इटावा की यह घटना न सिर्फ एक आपराधिक मामला है, बल्कि यह देश में जातिगत भेदभाव की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक ज्वलंत उदाहरण भी है। जहां एक ओर धार्मिक कथावाचन(DHIRENDRA SHASTRI) की परंपरा समाज में आध्यात्मिक शांति और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर कथावाचकों(DHIRENDRA SHASTRI) के साथ जाति के नाम पर किया गया यह व्यवहार हमारी सामाजिक चेतना को झकझोरने वाला है।

राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर घमासान मचा है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या केवल बयानबाज़ी(DHIRENDRA SHASTRI) से सामाजिक बदलाव आएगा? क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा या यह घटना भी बाकी मामलों की तरह धीरे-धीरे भूल की परतों में दब जाएगी?

अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाती है और समाज में बराबरी का भाव सुनिश्चित करने के लिए किस दिशा में पहल की जाती है। फिलहाल के लिए यह स्पष्ट है कि इटावा (DHIRENDRA SHASTRI)की यह घटना न केवल कानून व्यवस्था का, बल्कि सामाजिक चेतना का भी इम्तिहान है।

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