DEPUTY CM VIJAY: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी हुई तेज़DEPUTY CM VIJAY: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी हुई तेज़

DEPUTY CM VIJAY: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी हुई तेज़

बिहार में विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है और इसी के साथ राज्य में राजनीतिक हलचलें भी तेज हो गई हैं… चुनाव आयोग की ओर से कुछ ही दिनों में मतदान की तारीखों का एलान होना है… इस बीच, जनता दल यूनाइटेड की ओर से राज्य में विधानसभा चुनाव को एक ही चरण में कराने की मांग ने सियासी गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

JDU के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने हाल ही में एक बयान जारी कर कहा था कि, उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि राज्य में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में और छठ पूजा के ठीक बाद कराए जाएं, ताकि राज्य के बाहर रह रहे प्रवासी बिहारी भी अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। उनका तर्क था कि बड़ी संख्या में बिहारी मजदूर और कामगार त्योहारों के समय अपने घर लौटते हैं और अगर चुनाव उस दौरान होते हैं, तो मतदान प्रतिशत में वृद्धि संभव है।

JDU की इस मांग पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर पार्टी की अपनी सोच और मांग होती है, लेकिन चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए गठबंधन आयोग के निर्णय को पूरी तरह स्वीकार करेगा।

एएनआई से बातचीत में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “हर पार्टी की अपनी सोच और मांगें होती हैं। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है। वह जो भी फैसला लेगा, उसे सभी को मानना होगा।” उनका यह बयान यह संकेत देता है कि बीजेपी और एनडीए किसी भी प्रकार की मांग या दबाव की राजनीति से दूरी बनाए हुए है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता का सम्मान करता है।

इस मौके पर विजय सिन्हा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने दोनों नेताओं को ‘अप्पू’ और ‘पप्पू’ की संज्ञा देते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा, “’अप्पू’ और ‘पप्पू’ दो नेता हैं। वे एक को मुख्यमंत्री और दूसरे को प्रधानमंत्री बनाते रहते हैं। वे संवैधानिक पदों पर बैठे हैं, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असफल रहे हैं।”

विजय सिन्हा का यह बयान उस राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है, जिसमें एनडीए नेतृत्व विपक्षी गठबंधन को अनुभवहीन और अव्यवस्थित बताने की कोशिश करता रहा है। उनका कहना था कि बिहार की जनता ने यह तय कर लिया है कि अब वही नेता स्वीकार्य होगा, जिसने सेवाभाव से राज्य का विकास किया हो और ‘बिहारी’ शब्द को अपमान से निकालकर गौरव का प्रतीक बनाया हो।

शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में बिहार चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में सभी दलों को चुनाव संबंधी दिशा-निर्देश, सुरक्षा व्यवस्था, आचार संहिता और मतदान की संभावित तारीखों पर सुझाव देने का अवसर मिला।

चुनाव आयोग की इस पहल को सभी दलों ने स्वागत योग्य बताया, हालांकि कुछ दलों ने अपनी विशेष मांगें भी रखीं। JDU की एक चरण में मतदान की मांग को जहां कुछ दलों ने समर्थन दिया, वहीं कई अन्य दलों ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए खारिज भी किया।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग अब से दो से तीन दिनों के भीतर बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। संभावना जताई जा रही है कि चुनाव अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के मध्य तक तीन से पांच चरणों में संपन्न हो सकते हैं, हालांकि JDU ने इसे एक चरण में करने की मांग की है।

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह सवाल भी गहराता जा रहा है कि इस बार बिहार में चुनावी मुद्दे क्या होंगे। एनडीए अपनी ओर से विकास, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार को प्रमुख मुद्दा बना सकता है। वहीं, विपक्षी गठबंधन महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

तेजस्वी यादव लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी पर निशाना साधते रहे हैं, जबकि राहुल गांधी भी बिहार में रैलियों और पदयात्राओं के माध्यम से विपक्ष की स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों, सामाजिक समीकरणों और विकास के वादों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में चुनाव आयोग की घोषणा के बाद पूरे राज्य में एक बार फिर से सियासी पारा चढ़ना तय है।