विदेश

पीएम मोदी का भेंट किया मुकुट: बांग्लादेश के जेशोरेश्वरी मंदिर से चोरी

भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों की गहराई को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण मामला हाल ही में सामने आया है। बांग्लादेश के सतखीरा में स्थित मां काली का जेशोरेश्वरी मंदिर, जो 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, से पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा भेंट किया गया मुकुट चोरी हो गया है। यह मुकुट न केवल एक धार्मिक प्रतीक था, बल्कि दोनों देशों के बीच की मित्रता और सहयोग का भी प्रतीक था।

जेशोरेश्वरी मंदिर का महत्व

जेशोरेश्वरी मंदिर का नाम “जेशोर की देवी” से लिया गया है और यह हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर बांग्लादेश के सतखीरा जिले के ईश्वरीपुर में स्थित है और इसे 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अनारी नामक ब्राह्मण द्वारा स्थापित किया गया था।

मंदिर का इतिहास

  1. स्थापना: मंदिर की स्थापना अनारी ब्राह्मण ने 12वीं शताब्दी में की। उन्होंने जेशोरेश्वरी पीठ के लिए 100 दरवाजों वाला मंदिर बनवाया।
  2. जीर्णोद्धार: 13वीं शताब्दी में, इस मंदिर का जीर्णोद्धार लक्ष्मण सेन ने किया। उन्होंने मंदिर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  3. पुनर्निर्माण: 16वीं शताब्दी में, राजा प्रतापादित्य ने मंदिर का पुनर्निर्माण किया और इसे एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बनाया।

पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा

पीएम मोदी ने 27 मार्च, 2021 को बांग्लादेश का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने जेशोरेश्वरी मंदिर का भी दौरा किया और वहां मां काली का एक विशेष मुकुट भेंट किया। यह मुकुट सोने की परत चढ़ा चांदी का था और इसे मंदिर की देवी के सिर पर रखा गया था।

चोरी की घटना

हाल ही में, इस मुकुट की चोरी की खबर सामने आई। स्थानीय पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि चोरी गुरुवार दोपहर को हुई और चोर की पहचान के लिए मंदिर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।

ज्योति चट्टोपाध्याय, जो इस मंदिर की देखभाल करने वाले परिवार से हैं, ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि यह मुकुट भक्तों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। यह चोरी केवल एक वस्तु की चोरी नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के लिए एक बड़ा धक्का है।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

जेशोरेश्वरी मंदिर न केवल हिंदू धर्म में एक पवित्र स्थल है, बल्कि यह भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक भी है। यहां हर साल हजारों भक्त आते हैं, जो देवी मां के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

इस मंदिर का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि यहां विभिन्न धार्मिक समारोहों का आयोजन किया जाता है, जो समुदाय के एकीकरण को बढ़ावा देते हैं।

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