प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो कुछ समय के लिए हटने का मामला अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। यह विवाद अब संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी स्थायी समिति तक पहुंच गया है। समिति ने Meta से इस मामले में जवाब मांगा है और रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी के CEO मार्क जकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने की बात भी कही गई है।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जुलाई के आखिर में प्रधानमंत्री मोदी का एक फेसबुक वीडियो अचानक प्लेटफॉर्म से गायब हो गया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री छात्रों और पेपर लीक जैसे अहम मुद्दों पर बात कर रहे थे। कुछ समय बाद वीडियो दोबारा दिखाई देने लगा। Meta ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया और सार्वजनिक रूप से खेद भी जताया।
हालांकि, सरकार इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिख रही है। इसी वजह से संसदीय समिति ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। समिति का कहना है कि सिर्फ तकनीकी गलती बताना पर्याप्त नहीं है और कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर ऐसा हुआ कैसे।
इस विवाद के बीच ‘सेफ हार्बर’ प्रोटेक्शन की भी चर्चा तेज हो गई है। भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यह कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसका मतलब यह है कि किसी यूजर द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की सीधी कानूनी जिम्मेदारी कंपनी पर नहीं आती, बशर्ते वह कानून और तय नियमों का पालन कर रही हो।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि Meta इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं देता, तो उसके सेफ हार्बर प्रोटेक्शन की समीक्षा की सिफारिश की जा सकती है। हालांकि, फिलहाल इस सुरक्षा को खत्म करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और यह केवल संभावित कार्रवाई की चेतावनी है।
इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) भी Meta के अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण मांग चुका है। सरकार जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री का वीडियो आखिर क्यों हटा और कंपनी के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में ऐसी स्थिति कैसे बनी। साथ ही, एल्गोरिद्म, कंटेंट मॉडरेशन और वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
Meta का कहना है कि वीडियो किसी नियम के उल्लंघन की वजह से नहीं हटाया गया था, बल्कि यह एक तकनीकी समस्या थी। कंपनी के अनुसार, जैसे ही गलती की जानकारी मिली, वीडियो को तुरंत बहाल कर दिया गया और सार्वजनिक रूप से खेद भी व्यक्त किया गया।
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच कंटेंट मॉडरेशन, डेटा सुरक्षा, एल्गोरिद्म की पारदर्शिता और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर कई बार मतभेद सामने आए हैं। इस बार मामला सीधे प्रधानमंत्री के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता और बढ़ गई है। अब सभी की नजर Meta के अगले कदम और इस मामले में आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।
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