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हरियाणा कांग्रेस ने अपने संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत जिलाध्यक्ष पद के लिए प्रक्रिया को तेज कर दिया है। क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हरियाणा कांग्रेस के नेताओं को 30 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। इसके तहत उम्मीदवारों के इंटरव्यू शुरू हो गए हैं। इंटरव्यू का मकसद ये है कि हर जिले से 6 संभावित नामों का पैनल तैयार किया जा सके, जिससे पार्टी नेतृत्व को योग्य और मजबूत चेहरों का चयन करने में आसानी हो। सूत्रों के मुताबिक, इंटरव्यू लेने वाले केंद्रीय पर्यवेक्षक उम्मीदवारों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि अगर उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया तो वे बीजेपी और आरएसएस के प्रचार को कैसे जवाब देंगे? इसके अलावा संगठन को मजबूत करने का उनका तरीका, कार्यशैली और रणनीति क्या होगी – इस पर भी फोकस किया जा रहा है।

सामूहिक भावना परख रही पार्टी

एक अहम बात ये भी है कि जिन लोगों ने खुद जिलाध्यक्ष बनने के लिए आवेदन किया है, उनसे ये भी पूछा जा रहा है कि अगर वे चयनित नहीं होते, तो उस स्थिति में कौन सा दूसरा चेहरा इस पद के लिए उपयुक्त हो सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व सिर्फ दावेदारी पर नहीं, उम्मीदवारों की संगठनात्मक समझ और सामूहिक भावना को भी परख रहा है। सिर्फ संगठन की बात नहीं, पर्यवेक्षक दावेदारों से ये भी पूछ रहे हैं कि प्रदेश में किन नेताओं की जनता के बीच सबसे मजबूत पकड़ है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह, रोहतक से सांसद दीपेंद्र हुड्डा, और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव जैसे नाम शामिल हैं।

जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश

केंद्रीय पर्यवेक्षक ये भी जानना चाह रहे हैं कि हरियाणा में कांग्रेस तीन बार चुनाव क्यों हार गई? 2024 में बीजेपी विरोधी माहौल और कांग्रेस के प्रति सकारात्मकता के बावजूद सत्ता से दूरी के कारणों को जानने का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में अभी तक वरिष्ठ नेताओं को शामिल नहीं किया गया है। लेकिन यह बताया जा रहा है कि जब प्रत्येक जिले से 6 नामों का पैनल बन जाएगा, तब प्रदेश के बड़े नेताओं के साथ इन नामों पर चर्चा होगी। इसके बाद इस सूची को तीन नामों तक सीमित किया जाएगा।  हरियाणा कांग्रेस इस कवायद के ज़रिए जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। संगठनात्मक सुधार, कार्यकर्ताओं में उत्साह और सही नेतृत्व के चयन से पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहती है।