चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक में हुआ हंगामाचंडीगढ़ नगर निगम की बैठक में हुआ हंगामा

चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक में हुआ हंगामा

 

चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग सोमवार को जबरदस्त हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक का मकसद शहर के प्रशासनिक कामों पर चर्चा करना था, लेकिन हालात ऐसे बने कि निगम हॉल में नारेबाजी, धक्कामुक्की और पर्चे फाड़ने जैसे दृश्य देखने को मिले

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षदों ने मेयर हरप्रीत कौर बबला के विदेश दौरे और निगमकर्मियों के निलंबन को लेकर जमकर विरोध किया।

कांग्रेस और AAP पार्षद शुरुआत से ही मेयर को घेरने के मूड में थे। उन्होंने आरोप लगाया कि, मेयर हरप्रीत कौर बबला ने विदेश दौरे को निजी प्रचार का माध्यम बना लिया है। साथ ही निगमकर्मियों के निलंबन को भी बड़ा मुद्दा बनाया। विपक्ष का कहना था कि, कर्मचारी सिर्फ अपने हक की बात कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया

जब विपक्ष ने लगातार शोरगुल करना शुरू किया तो मेयर और बीजेपी पार्षदों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। यहीं से माहौल गरम हो गया और दोनों पक्षों में तीखी बहस शुरू हो गई।
विपक्ष को शांत कराने के लिए मेयर बबला ने अपनी विदेश यात्रा का जिक्र किया

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उन्होंने वहां चंडीगढ़ को मिला एक अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड पार्षदों को दिखाया और कहा कि,“ये अवॉर्ड आपके शहर को मिला है। आप शहर के विकास पर गर्व करने के बजाय यहां राजनीति कर रहे हैं।”
लेकिन ये बात विपक्ष को रास नहीं आई। कांग्रेस और AAP के पार्षदों ने ‘कर्मचारी शोषण बंद करो’ और ‘बीजेपी मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने शुरू कर दिए।

विपक्ष ने हाल ही में हुए उस विवाद का भी जिक्र किया, जिसमें हरियाणा के मंत्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ में झाड़ू लगाई थी और उसके बाद निगमकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।

कांग्रेस और AAP ने मांग की कि निलंबित कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाए।

मीटिंग में हंगामा बढ़ते-बढ़ते उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब विपक्षी पार्षद वेल में उतर आए। उनके हाथों में पर्चे थे, जिन पर कर्मचारी समर्थन और बीजेपी विरोधी नारे लिखे थे। उन्होंने ये पर्चे हवा में लहराए और नारेबाजी की।

इसी दौरान उन्होंने मीटिंग के एजेंडा की कॉपियां फाड़कर मेयर की ओर उछाल दीं। ये नजारा देखकर मेयर बबला नाराज हो गईं और मीटिंग को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया
मेयर बबला ने साफ कहा कि, हाउस की कार्रवाई तभी शुरू होगी जब तक हंगामा करने वाले पार्षदों को बाहर नहीं निकाला जाता।

इसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर बंटी, डिप्टी मेयर तरुण मेहता, कांग्रेस पार्षद सचिन गालव और AAP पार्षद प्रेमलता को बैठक से बाहर कर दिया गया।

बाहर निकालने की कार्रवाई के दौरान मार्शलों और पार्षदों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। हॉल का माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया।

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पार्षदों को बाहर निकालने के बाद मेयर हरप्रीत कौर बबला ने मीडिया से कहा कि, “इन पार्षदों ने न सिर्फ मीटिंग का माहौल बिगाड़ा बल्कि चंडीगढ़ को मिले अवॉर्ड की भी बेइज्जती की। एजेंडे की कॉपियां फाड़कर मेरे चेहरे पर फेंकी गईं। मैंने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसा बर्ताव पहले कभी नहीं देखा।”

कांग्रेस और AAP पार्षदों ने मेयर के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि, बीजेपी और मेयर असल मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं। निगमकर्मियों के साथ अन्याय हो रहा है और वे केवल उनकी आवाज उठा रहे थे।

“शहर में गंदगी बढ़ रही है, कर्मचारी हड़ताल पर हैं और मेयर विदेशी दौरे पर अवॉर्ड लेने में व्यस्त हैं। जब हमने ये सवाल उठाए तो हमें जबरन बाहर निकाला गया,” विपक्षी पार्षदों का बयान था।
चंडीगढ़ नगर निगम की बैठकों में हंगामा होना अब आम बात हो गई है।

विपक्ष का आरोप है कि, मेयर और बीजेपी पक्ष सवालों से बचने के लिए विपक्षी पार्षदों को दबाने का काम करते हैं। वहीं, मेयर का कहना है कि, विपक्ष केवल हंगामा करने आता है और कामकाज ठप कर देता है।

इस हंगामे का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। सफाईकर्मी और अन्य कर्मचारी कई दिनों से आंदोलन पर हैं, जिसकी वजह से शहर में जगह-जगह कचरा जमा हो रहा है। लोग परेशान हैं लेकिन निगम हाउस में समाधान की जगह राजनीतिक खींचतान चल रही है।

हाउस मीटिंग अब दोबारा कब बुलाई जाएगी, इस पर फिलहाल कोई साफ संकेत नहीं मिले हैं। विपक्ष अपने विरोध को तेज करने की तैयारी में है तो मेयर और बीजेपी पार्षद इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

चंडीगढ़ के लोगों की नजर अब अगली मीटिंग पर टिकी है, जहां ये देखना होगा कि, राजनीतिक विवाद खत्म होता है या फिर हाउस का माहौल फिर से हंगामे की भेंट चढ़ता है।