Screenshot 2025 03 03 082548

channel4news logoCHANNEL4 NEWS INDIA


पंजाब में शहरी विकास प्राधिकरणों के चेयरमैन पद पर मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल  ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि अब पंजाब की सत्ता असल में अरविंद केजरीवाल के हाथों में है और भगवंत मान केवल कठपुतली मुख्यमंत्री रह गए हैं।

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, कांग्रेस नेता सुखपाल खैहरा और अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब की जनता को धोखा दिया है।

विपक्ष ने तीखे सवाल उठाए

क्या पंजाब की सत्ता अब दिल्ली से चलाई जा रही है?

क्या मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास कोई असली ताकत नहीं बची?

क्या जनता के वोट से बनी सरकार को अफसरशाही के हवाले किया जा रहा है?

आम आदमी पार्टी ने दी सफाई

इन आरोपों पर आम आदमी पार्टी की तरफ से पंजाब प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा, शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस और वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने संयुक्त बयान जारी किया। अमन अरोड़ा ने कहा कि यह फैसला किसी साजिश के तहत नहीं, बल्कि शहरी विकास कार्यों में तेजी और प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल करने के लिए लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया: “मुख्य सचिव केवल प्रस्तावों को स्वीकृति देंगे, लेकिन अंतिम मंजूरी PUDA और राज्य कैबिनेट से ही आएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान अब भी PUDA के चेयरमैन हैं, उनके अधिकारों में कोई कटौती नहीं हुई है।”

दूरदर्शिता से भरा सुधार: हरपाल सिंह चीमा

वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने इस कदम को दूरदर्शिता से भरा सुधार करार दिया। उन्होंने कहा: मुख्यमंत्री ने दूरदर्शिता दिखाते हुए सभी शहरी विकास प्राधिकरणों की अध्यक्षता मुख्य सचिव को सौंपी, ताकि विकेन्द्रीकृत शासन व्यवस्था को मजबूती मिले और स्थानीय मुद्दों पर तेजी से फैसला लिया जा सके। शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने अपने शासनकाल में कई गड़बड़ियां कीं, अब वही आम आदमी पार्टी की जनहितकारी नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि विपक्ष मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि प्रशासन को मज़बूत करने के नाम पर जन प्रतिनिधित्व को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जनता ने मुख्यमंत्री को वोट दिया, तो फिर अफसर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है? अकाली दल का कहना है कि इससे साफ हो रहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार अब पंजाब की ज़रूरतों को नहीं, बल्कि दिल्ली की लाइन पर चल रही है।