Category: आध्यात्मिक संवाद

स्वामी अवधेशानंद गिरि

मुण्डकोपनिषद 1.2.3 चेतावनी देता है कि निष्ठाहीन कर्मकाण्ड, भक्ति या शास्त्र निष्ठा का अभाव, पतन की ओर ले जाते हैं- स्वामी अवधेशानंद गिरि

यस्याग्निहोत्रमदर्शमपौर्णमासम् अचातुर्मास्यमनाग्रयणमतिथिवर्जितं च । अहुतमवैश्वदेवमविधिना हुतम् आ सप्तमांस्तस्य लोकान् हिनस्ति ॥ – मुण्डकोपनिषद् १.२.३ वेदान्त का मूल स्वर ज्ञान है…

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छोटे कामों से बड़ी सफलता: स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्रों की प्रेरणा

हम सभी जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं। पर अक्सर यह सोचकर ठहर जाते हैं कि हमें…

Swami Avdheshananda Giri Ji Maharaj: हरिसेवा आश्रम के वार्षिकोत्सव पर हुआ "सन्त-सम्मेलन”

Swami Avdheshananda Giri Ji Maharaj: हरिसेवा आश्रम के वार्षिकोत्सव पर हुआ “सन्त-सम्मेलन”, स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने किया उद्बोधन1

Swami Avdheshananda Giri Ji Maharaj: हरिसेवा आश्रम के वार्षिकोत्सव पर हुआ “सन्त-सम्मेलन” श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनन्तश्रीविभूषित जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद…