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Manohar Lal : मनोहर लाल से BJP ने बनाई दूरी, पार्टी के लिए मजबूरी या जरूरी ?

Manohar Lal : हरियाणा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की रणनीति स्पष्ट है: केंद्रीय मंत्री और पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर से परहेज। पीएम मोदी की अब तक की दो चुनावी सभाओं में मनोहर लाल का मंच पर न होना, पार्टी के एंटी इनकंबेंसी से बचने के प्रयास को दर्शाता है। बीजेपी जानती है कि मनोहर लाल के कार्यकाल के दौरान कुछ निर्णयों ने जनता में नाराजगी पैदा की है, और इसी कारण पार्टी ने उन्हें मुख्यधारा से हटा दिया है।

मनोहर लाल की अनुपस्थिति सिर्फ मंच पर नहीं, बल्कि चुनाव प्रचार के पोस्टरों से भी स्पष्ट है। यह संकेत है कि बीजेपी चुनावी माहौल को नए चेहरे और विचारों के साथ आगे बढ़ाना चाहती है। पीएम मोदी की कुरुक्षेत्र सभा में मनोहर लाल की नदारदगी ने इस रणनीति को और मजबूती दी, जबकि मनोहर लाल खुद करनाल से लोकसभा सांसद हैं।वहीं मनोहर लाल का पिछला कार्यकाल उनके लिए मुश्किल भरा रहा। उन्होंने किसानों के आंदोलन को “मुखौटा” करार दिया, जिससे वे और भी विवादों में घिर गए। हिसार में एक युवा के सवाल पर भड़कना, उनकी सियासी स्थिति को और कमजोर कर गया। इन घटनाओं ने बीजेपी के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी, क्योंकि पार्टी को अपने कार्यों का बचाव करना पड़ रहा है।Manohar Lal

इसके अलावा, मनोहर लाल ने कुमारी सैलजा को बीजेपी में शामिल होने का ऑफर दिया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। यह बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को भी दर्शाता है और बताता है कि खट्टर की लोकप्रियता में कमी आई है।बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर को विधानसभा चुनाव से 6 महीने पहले हटाया था। इसके पीछे पार्टी में उनकी नीतियों के प्रति नाराजगी और असहमति थी। मनोहर लाल खट्टर को “पोर्टल वाला मुख्यमंत्री” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने कई सरकारी सेवाओं के लिए पोर्टल लांच किए, जो जनता के लिए समस्या बन गए।Manohar Lal

मनोहर लाल खट्टर के कुछ फैसलों ने बीजेपी को हरियाणा में परेशानी में डाल दिया। सरपंचों की ताकत को सीमित करने और भवन निर्माण के नियमों के चलते ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनता की नाराजगी बढ़ी। नए मुख्यमंत्री ने खट्टर के कुछ निर्णयों को बदलकर स्थिति को सुधारने का प्रयास किया।हालांकि,मनोहर लाल खट्टर पूरी तरह से चुनावी दृश्य से गायब नहीं हैं। उन्होंने कुछ सीटों पर अपने करीबी उम्मीदवारों को समर्थन दिया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पंजाबी, गैर-जाट और पिछड़े वोटरों की संख्या अधिक है।Manohar Lal

कुल मिलाकर, हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी का लक्ष्य है अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ना और जनता का विश्वास पुनः हासिल करना। खट्टर की भूमिका अब सीमित हो गई है, और पार्टी नए चेहरों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इससे यह साफ है कि बीजेपी अपनी रणनीतियों में बदलाव के साथ एक नई दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है।Manohar Lal

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