महाराष्ट्र की सियासत में शनिवार को बड़ा सियासी मोड़ तब आया जब करीब 20 साल बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ मंच पर नजर आए। मुंबई में आयोजित ‘विजय रैली’ में दोनों नेताओं की एकजुटता ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। ये साथ सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि एक बड़ा सियासी संकेत है कि राज्य में मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की राजनीति एक नए रूप में उभर रही है। लेकिन इस नए समीकरण ने जहां सत्तारूढ़ महायुति (बीजेपी-शिंदे) के लिए चिंता बढ़ाई है, वहीं महाविकास अघाड़ी के भीतर भारी असहजता और अंतर्विरोध खड़े कर दिए हैं।
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