मुण्डकोपनिषद 1.2.3 चेतावनी देता है कि निष्ठाहीन कर्मकाण्ड, भक्ति या शास्त्र निष्ठा का अभाव, पतन की ओर ले जाते हैं- स्वामी अवधेशानंद गिरि
यस्याग्निहोत्रमदर्शमपौर्णमासम् अचातुर्मास्यमनाग्रयणमतिथिवर्जितं च । अहुतमवैश्वदेवमविधिना हुतम् आ सप्तमांस्तस्य लोकान् हिनस्ति ॥ – मुण्डकोपनिषद् १.२.३ वेदान्त का मूल स्वर ज्ञान है…









