पंजाब में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाए जाने की हालिया घटनाओं ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अमृतसर में एक और पुलिस अधिकारी पर फायरिंग का मामला सामने आया है। रविवार शाम ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहे अमृतसर GRP के ASI सुखचैन सिंह पर बाइक सवार तीन युवकों ने गोली चला दी।
फायरिंग में गोली उनके बाएं कंधे और बांह को छूती हुई निकल गई। हमले में वह बाल-बाल बच गए। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अलग-अलग संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पंजाब में पिछले कुछ महीनों के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले और हत्याओं के कई मामले सामने आ चुके हैं।
मई में ASI जोगा सिंह की हत्या
24 मई 2026 को अमृतसर के पास ट्रैफिक पुलिस के ASI जोगा सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह दोपहिया वाहन से ड्यूटी के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में उन पर फायरिंग हुई। उन्हें कई गोलियां लगीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान निजी रंजिश और टारगेटेड हमले समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखा था।
सितंबर में भी हुईं घटनाएं
11 सितंबर को अमृतसर के अजनाला इलाके में ASI जसवंत सिंह पर बाइक सवार दो युवकों ने गोली चला दी थी। गोली उनकी पगड़ी को पार करते हुए सिर को छूकर निकल गई थी। जांच के बाद पुलिस ने करणबीर सिंह उर्फ नंदी को गिरफ्तार किया था। हालांकि, हथियार बरामदगी के दौरान वह पुलिस हिरासत से भाग गया था। बाद में 26 सितंबर को पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।
18 सितंबर को अमृतसर में PCR में तैनात ASI हरजीत सिंह पर भी फायरिंग हुई थी। भट्ठा-भगतांवाला अनाज मंडी के पास बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें गोली मारी थी। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हरजीत सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई।
चंडीगढ़ में हेड कांस्टेबल की हत्या
25 सितंबर को चंडीगढ़ पुलिस के हेड कांस्टेबल नितिन कुमार की सेक्टर-22 स्थित उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने उनके बेटे को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में पारिवारिक विवाद का एंगल सामने आया था।
ASI सुखचैन सिंह पर हुए ताजा हमले के बाद पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब सरकार पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री भगवंत मान से इन घटनाओं को लेकर जवाब मांगा।
हालांकि, सामने आए सभी मामलों की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। अलग-अलग घटनाओं में जांच के अलग-अलग पहलू सामने आए हैं और फिलहाल इन सभी वारदातों को किसी एक आपराधिक नेटवर्क से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
