उत्तर प्रदेश

Asim Arun: मंत्री असीम अरुण की दिखी सादगी, नियमों के प्रति निष्ठा बनी मिसाल, गाड़ी के चालान करने की अपील की

Asim Arun: मंत्री असीम अरुण की दिखी सादगी

जब सत्ता में बैठे लोग अक्सर नियमों को अपने अनुरूप मोड़ने की कोशिश करते हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण (Asim Arun) ने अपने आचरण से एक उदाहरण पेश किया है। आमतौर पर देखा जाता है कि, प्रभावशाली लोग ट्रैफिक चालान से बचने की कोशिश करते हैं,

या फिर उसे रद्द करवाने के लिए सिफारिशों का सहारा लेते हैं, लेकिन असीम अरुण(Asim Arun) ने ठीक इसके विपरीत किया। उन्होंने एक अनधिकृत नीली बत्ती लगी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल करने से इनकार किया और खुद पुलिस कमिश्नर को फोन करके गाड़ी का चालान कटवाने की अपील की।

मामला वाराणसी का है, जहां सोमवार 30 जून को मंत्री असीम अरुण(Asim Arun) सरकारी दौरे पर थे। प्रोटोकॉल के तहत उन्हें यूपी सरकार की ओर से एक इनोवा गाड़ी (रजिस्ट्रेशन नंबर यूपी 65 क्यूटी 9650) उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन उस गाड़ी पर अनधिकृत रूप से नीली बत्ती लगी हुई थी, जिसे देख मंत्री(Asim Arun) ने गाड़ी में बैठने से साफ इनकार कर दिया।

उन्होंने(Asim Arun) न केवल वाहन का उपयोग करने से मना किया बल्कि वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को फोन करके कहा कि इस नियम उल्लंघन के लिए गाड़ी का तत्काल चालान किया जाए।

बाद में मंत्री(Asim Arun) ने पुलिस कमिश्नर को एक आधिकारिक पत्र भी भेजा जिसमें उन्होंने गाड़ी का विवरण और उसकी तस्वीर संलग्न की। पत्र में उन्होंने लिखा, “कृपया सूचित किया जाए कि 30 जून को मेरे(Asim Arun) वाराणसी आगमन पर मेरे(Asim Arun) उपयोग के लिए एक वाहन की व्यवस्था की गई थी। चूंकि वाहन में अनधिकृत बत्ती लगी हुई थी, इसलिए मैंने उसका उपयोग नहीं किया। कृपया सुनिश्चित करें कि नियमानुसार इस वाहन के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जाए।”

इस कदम से न केवल आम जनता में एक सकारात्मक संदेश गया है, बल्कि ये भी साबित हुआ है कि कानून सबके लिए बराबर है — चाहे वो कोई मंत्री हो या आम नागरिक। असीम अरुण का ये व्यवहार उन लोगों को भी आईना दिखाता है, जो सत्ता के प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हैं और कानून को अपने ऊपर लागू नहीं मानते।

मंत्री असीम अरुण ने ये भी कहा कि, सरकारी गाड़ियों पर भी ट्रैफिक नियम समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि, नीली बत्ती या अन्य प्रकार के स्टिकर लगाने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, फिर भी कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि इसे अपने प्रभाव दिखाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने ऐसे सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि सड़क पर सभी वाहनों के लिए एक समान कानून लागू हो।

ये पहली बार नहीं है जब असीम अरुण(Asim Arun) ने अपनी सादगी और जनसेवा की भावना से लोगों का दिल जीता हो। इससे पहले भी वो अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए चर्चाओं में आ चुके हैं। हाल ही में उन्होंने कचरे की गाड़ी में बैठकर वार्डों का दौरा किया और आम लोगों से सीधे संवाद किया।

इस दौरे के दौरान उन्होंने(Asim Arun) लोगों की समस्याएं जानीं और उन्हें हल करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए कहा था कि वो लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश कर रहे हैं और यही सही जनसेवा है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे असीम अरुण(Asim Arun) की छवि एक ईमानदार, कर्मठ और जनता के प्रति संवेदनशील जनसेवक की रही है। उन्होंने आईपीएस रहते हुए भी कई बार सिस्टम में सुधार के प्रयास किए थे और अब मंत्री बनने के बाद भी उनकी कार्यशैली में वही पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाई देती है।

उनकी इस पहल की सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में काफी सराहना हो रही है। लोगों ने उनके इस कदम को “नयी राजनीति” की मिसाल बताया है, जहां जनता के सेवक पहले खुद को कानून के दायरे में रखते हैं और फिर दूसरों से उसका पालन करवाते हैं।

आज जब देशभर में वीआईपी संस्कृति पर बहस छिड़ी हुई है, ऐसे में असीम अरुण का ये आचरण एक नई दिशा दिखाने वाला है। ये संदेश देता है कि, अगर मंत्री खुद नियमों का पालन करेंगे, तभी आम नागरिकों में भी जागरूकता और सम्मान की भावना उत्पन्न होगी।

मंत्री असीम अरुण ने ये साबित कर दिया है कि, पद और शक्ति से बढ़कर कानून का सम्मान और जनता की सेवा होती है। ऐसे उदाहरण प्रशासन और समाज दोनों के लिए प्रेरणादायक हैं, और उम्मीद की जानी चाहिए कि अन्य जनप्रतिनिधि भी इससे सीख लेकर जनता के बीच अपनी साख मजबूत करें

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