Akhilesh Yadav met Azam Khan: आजम खान से मिले सपा प्रमुख अखिलेश यादव
रामपुर की सियासत एक बार फिर सुर्खियों में है, और इसकी वजह है समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के बीच बुधवार को हुई मुलाकात। ये मुलाकात यूं तो औपचारिक दिखाई दी, लेकिन इसके पीछे कई राजनीतिक मायने छिपे हुए हैं। लंबे समय से पार्टी में हाशिए पर चल रहे आजम खान से अखिलेश यादव की यह मुलाकात कई सवालों के जवाब भी दे रही है और नए सवाल भी खड़े कर रही है।
आजम खान पिछले महीने 23 सितंबर को लगभग 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। वह डकैती, चोरी, धोखाधड़ी जैसे आरोपों सहित 100 से अधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। रिहाई के बाद से यह पहली बार था जब समाजवादी पार्टी का कोई बड़ा नेता उनसे मिलने पहुंचा। यह मुलाकात रामपुर स्थित उनके आवास पर हुई, जहां आजम खान ने खुद अखिलेश की अगवानी की।
इस मुलाकात से पहले आजम खान ने एक स्पष्ट अपील की थी – कि अखिलेश यादव अकेले आएं और किसी अन्य नेता को साथ न लाएं। आजम खान की इस बात को अखिलेश ने माना और रामपुर के मौजूदा सांसद माउलाना मोहिबुल्लाह नदवी को बरेली एयरपोर्ट पर ही छोड़ दिया। माना जाता है कि नदवी और आजम खान के संबंध अच्छे नहीं हैं। दरअसल, रामपुर में टिकट वितरण के समय आजम खान की पसंद को दरकिनार कर नदवी को उम्मीदवार बनाया गया था, जिसे आजम ने पसंद नहीं किया था।
इस बात की पुष्टि खुद आजम खान ने एक इंटरव्यू में की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि वह सिर्फ अखिलेश यादव से मिलना चाहते हैं, किसी और से नहीं। आजम ने यह भी कहा कि जब वह और उनका परिवार कठिन समय में था, तब किसी ने उनका हाल नहीं पूछा। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि उनकी पत्नी ईद पर अकेले रोती रही, लेकिन किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया।
आजम खान के इस बयान से उनकी नाराजगी साफ नजर आई, और यह मुलाकात उस नाराजगी को कम करने की एक कोशिश मानी जा रही है। अखिलेश यादव लखनऊ से विमान द्वारा बरेली पहुंचे और फिर वहां से हेलीकॉप्टर से रामपुर रवाना हुए। उनका हेलीकॉप्टर मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में उतरा, जहां आजम खान ने उनका स्वागत किया और उन्हें अपने घर लेकर गए।
यह मुलाकात केवल दो नेताओं के बीच नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी था। समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक का एक बड़ा चेहरा माने जाने वाले आजम खान की पार्टी में वापसी की यह कोशिश पार्टी की आगामी रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। 2024 के लोकसभा चुनावों में रामपुर में आजम खान की राय को नजरअंदाज किया गया था, जिसके चलते सियासी हलकों में यह चर्चा जोरों पर थी कि पार्टी अब रामपुर में आजम की छाया से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, अब जबकि अखिलेश खुद आजम के दरवाजे तक पहुंचे हैं, यह संदेश देने की कोशिश है कि समाजवादी पार्टी अब भी अपने पुराने साथियों को महत्व देती है। पार्टी के भीतर यह मुलाकात एक ‘डैमेज कंट्रोल’ की तरह भी देखी जा रही है। आजम खान पार्टी के सबसे पुराने और भरोसेमंद चेहरों में से एक रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुसलमानों के बीच उनका प्रभाव भी किसी से छुपा नहीं है।
इस मुलाकात से यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या आजम खान को फिर से पार्टी में केंद्रीय भूमिका दी जाएगी? क्या आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनाव में उन्हें कोई जिम्मेदारी मिलेगी? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या रामपुर में समाजवादी पार्टी फिर से आजम खान के नेतृत्व में चुनावी रणनीति तैयार करेगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी को अगर प्रदेश में अपनी पुरानी ताकत हासिल करनी है, तो उसे अपने पुराने नेताओं को फिर से साथ लेना होगा। आजम खान जैसे नेताओं की नाराजगी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में अखिलेश यादव की यह पहल अहम मानी जा रही है।

