AJAY the untold story of a yogi: सिनेमाघरों में रिलीज ‘अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित बायोपिक ‘अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी’ शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। फिल्म को लेकर राज्य के प्रमुख शहरों में खासा उत्साह देखने को मिला। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में पहले ही दिन सिनेमाघरों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले दिन फिल्म ने रात 10 बजे तक लगभग 20 लाख रुपये की कमाई की।
फिल्म के प्रति दर्शकों का यह उत्साह केवल एक राजनीतिक शख्सियत पर आधारित कहानी के कारण नहीं है, बल्कि इसमें दिखाई गई प्रेरणादायक यात्रा ने लोगों को खासा प्रभावित किया है। फिल्म के पहले शो के बाद थिएटर से बाहर आए दर्शकों का कहना था कि यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक संकल्प और समर्पण की मिसाल है, जो बताती है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी एक व्यक्ति बड़ा बदलाव ला सकता है।
रवींद्र गौतम के निर्देशन में बनी यह फिल्म लेखक शांतनु गुप्ता की चर्चित किताब ‘द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर’ पर आधारित है। फिल्म में अभिनेता अनंत जोशी ने युवा योगी आदित्यनाथ की भूमिका निभाई है, जबकि परेश रावल, पवन मल्होत्रा और दिनेश लाल यादव जैसे सशक्त कलाकार भी फिल्म में नजर आते हैं। फिल्म की पटकथा और संवादों को लेकर भी दर्शकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
फिल्म में गोरखपुर से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक की योगी आदित्यनाथ की यात्रा को गहराई से दिखाया गया है।
विशेष रूप से युवाओं और हिंदूवादी संगठनों के बीच इस फिल्म को लेकर जबरदस्त क्रेज देखा गया। कई जगहों पर युवाओं ने भगवा वस्त्र पहनकर थिएटर में प्रवेश किया और फिल्म को ‘योगी जी की जीवनी’ के रूप में देखा।
इस बीच फिल्म को लेकर बरेली में विवाद भी सामने आया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस फिल्म को लेकर कथित तौर पर फतवा जारी किया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए ऐसी कोई भी फिल्म देखना शरीयत की नजर में नाजायज और हराम है, चाहे वह किसी भी शख्सियत पर क्यों न बनी हो, फिर वह योगी आदित्यनाथ हों या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि, “इस्लाम में लहव-लैब, खेलकूद, नाच-गाना, डांस, ढोल-बाजा और नगाड़ा हराम करार दिया गया है। ऐसे में फिल्में इस दायरे में आती हैं। जो लोग ऐसी फिल्में देखते हैं या दिखाते हैं, वे शरीयत के मुताबिक गुनहगार हैं। चाहे फिल्म किसी की भी जीवनी पर आधारित हो, वह फिल्म ही कहलाएगी और शरीयत की नजर में हराम ही रहेगी।”
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया चांद-सितारों तक पहुंच गई है, लेकिन कुछ लोग आज भी कट्टरपंथी विचारधारा के तहत धर्म का सहारा लेकर कट्टर बातें कर रहे हैं। मैं तमाम मुसलमानों से, खासकर नौजवानों से अपील करता हूं कि वे शरीयत की रौशनी में फैसला लें और ऐसी फिल्मों से दूर रहें।”
मौलाना की इस अपील के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इस पर प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि फिल्में एक कला का माध्यम हैं और इसे धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, मौलाना के समर्थकों का तर्क है कि इस्लाम में फिल्में देखना ही हराम है, चाहे उनका विषय कोई भी हो।
इस विवाद के बावजूद फिल्म ‘अजेय’ को लेकर लोगों का उत्साह कम होता नहीं दिख रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश के शहरों में यह मूवी एक ‘मस्ट वॉच’ बन चुकी है। कई थिएटरों में एडवांस बुकिंग भी शुरू हो गई है और सप्ताहांत में इसके कलेक्शन में और इजाफा होने की संभावना है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर, संवाद अदायगी और लोकेशन को लेकर भी दर्शकों ने सराहना की है। गोरखपुर मठ, नैनीताल और अन्य महत्वपूर्ण लोकेशनों को जिस तरह फिल्म में दर्शाया गया है, वह दर्शकों को एक वास्तविक अनुभव देता है।
युवाओं के बीच फिल्म की एक और खास वजह है – योगी आदित्यनाथ के जीवन से जुड़ी अनकही बातें। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक युवक ने अपना सब कुछ छोड़कर सन्यास लिया, फिर समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया और अंततः एक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचा।

