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उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जनजातीय समाज के बीच संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में अनुसूचित जनजाति मोर्चा की संगठनात्मक बैठक हुई। इसमें मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उदयपुर के सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने हिस्सा लिया। बैठक में संगठन की गतिविधियों को गति देने और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर चर्चा हुई।

डॉ. रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनजातीय समाज के विकास, सम्मान और उसे मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज देश की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विकास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाकर उनकी भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे जनजातीय गांवों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले इन गांवों को देश के अंतिम गांव के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब इन्हें ‘प्रथम गांव’ के तौर पर पहचान देने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में विकास को गति देना और वहां रहने वाले लोगों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सीमा पर रहने वाले लोग देश की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

रावत ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से इन इलाकों में बदलाव आया है। जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और लोगों को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 15 नवंबर को देशभर में जनजाति गौरव दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर सरकारी कार्यक्रमों के साथ भाजपा और अनुसूचित जनजाति मोर्चा भी संयुक्त रूप से आयोजन करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं, महापुरुषों और देश के लिए उसके योगदान को सामने लाया जाएगा।बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री संगठन फणींद्र नाथ शर्मा समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।