प्रसिद्ध गायक दलेर मेहंदी के कुंजापुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़े विवाद को लेकर इस पर तरह तरह की बातें हो रही है. दलेर मेहंदी के कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने जनता के सामने दलेर मेहंदी का अपमान किया था. मंत्री ने उन पर दारू पीकर गाने का आरोप लगाया. इस विवाद में अब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की एंट्री हुई है. उन्होंने ने दलेर मेहंदी को फोन किया है.
सोशल मीडिया के माध्यम से सीएम ने इसकी जानकारी दी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को प्रसिद्ध गायक दलेर मेहंदी से फोन पर वार्ता कर उनका कुशलक्षेम जाना. इस दौरान विगत दिनों हुए घटनाक्रम के संबंध में भी चर्चा हुई. उन्होंने इस दौरान कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड ‘अतिथि देवो भवः’ की समृद्ध परंपरा का संवाहक है. हमारी लोकसंस्कृति, आत्मीय आतिथ्य और सौहार्द की भावना ही देवभूमि की विशिष्ट पहचान है. यहां कला, संस्कृति और कलाकारों का सदैव स्वागत एवं सम्मान किया जाता रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि इस घटनाक्रम को पीछे छोड़कर आपसी संवाद, सौहार्द और सकारात्मकता की भावना के साथ आगे बढ़ा जाए.
इधर मंत्री के इस रवैये को लेकर सिंगर मीका सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘मंत्री सुबोध उनियाल ने स्टेज पर जिस तरह बात की, वह बहुत ही बदतमीजी और बेइज़्जती वाली थी. एक कलाकार को इज़्जत मिलनी चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों. कहा जाता है कि उन्होंने स्टेज पर कहा, “यहां आपसे पहले मनिंदर बुट्टर पिट के गया था. इतना पिटा था कि अब उसका बाप भी यहां से नहीं आ सकता.’
मीका ने आगे लिखा कि ‘क्या सच में एक मंत्री को कलाकारों के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए? यह कैसा बर्ताव है? कलाकार परफॉर्म करने, लोगों का मनोरंजन करने और अपने कमिटमेंट्स को पूरा करने आते हैं. वे पब्लिक प्लेटफॉर्म से बेइज्ज़ती के नहीं, बल्कि इज़्ज़त के हकदार हैं. सुबोध उनियाल जी, क्या आप चाहते हैं कि कलाकार उत्तराखंड आना बंद कर दें? ऐसा रवैया कलाकारों को उस राज्य में परफॉर्म करने से रोक सकता है जिसे हम सब प्यार करते हैं. कृपया याद रखें कि आज आप जिस पद पर हैं, वह लोगों ने ही आपको दिया है. पब्लिक ऑफिस ज़िम्मेदारी, विनम्रता और जवाबदेही के साथ आता है. मेरे मन में उत्तराखंड के लिए बहुत प्यार और इज्जत है, लेकिन कलाकार भी इज़्ज़त के हकदार हैं. मुझे पूरी उम्मीद है कि आप अपनी बातों पर सोचेंगे और इस मामले को इज्जत से देखेंगे. इज्जत दोतरफा रास्ता है.’
