राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस ने उदयपुर नगर निगम के लिए अपने 80 पार्षद प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पुराने चेहरों के साथ कई नए और चर्चित नामों को भी मौका दिया गया है। सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर 73 की हो रही है, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिजा व्यास की बहू और पूर्व पार्षद डॉ. हितांशी शर्मा को टिकट दिया गया है। वहीं, कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ की पत्नी डॉ. पूनम कुमारी राठौड़ को वार्ड नंबर 17 से मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस की ओर से जारी सूची में यूथ कांग्रेस उदयपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन केलावत को वार्ड नंबर 2 से टिकट मिला है।
नगर निगम में पिछली बार महापौर पद के प्रत्याशी रहे अरुण टांक को भी कांग्रेस ने वार्ड नंबर 3 से चुनाव मैदान में उतारा है। इसके अलावा बीजेपी से जनता सेना और फिर कांग्रेस में आए पंकज सुखवाल को वार्ड नंबर 45 से टिकट दिया गया है। युवा चेहरे सिद्धार्थ सोनी को वार्ड नंबर 14 से मौका मिला है। कांग्रेस ने इस सूची में छह पूर्व पार्षदों को भी टिकट दिया है। इनमें अरुण टांक, शंकर चंदेल, हितांशी शर्मा, हिदायतुल्ला, क्षिप्रा उपाध्याय और लक्ष्मीनारायण मेघवाल शामिल हैं। हालांकि टिकट वितरण में कुछ बड़े नामों को झटका भी लगा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव सुहालका और राव कल्याण सिंह का टिकट काट दिया गया है। वहीं अजय पोरवाल और देवेंद्र माली का नाम सूची में नहीं होने को लेकर भी चर्चा है। एक और दिलचस्प मामला वार्ड नंबर 6 का है, जहां अजीत चौधरी को टिकट दिया गया है।
बताया जा रहा है कि वो वार्ड नंबर 2 से आते हैं, जबकि वो वार्ड उनके लिए आरक्षित भी था। कांग्रेस ने इस बार ग्रामीण और स्थानीय निकाय स्तर के नेताओं पर भी भरोसा जताया है। बड़गांव के पूर्व सरपंच संजय शर्मा को वार्ड नंबर 1 से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं अंबेरी के सरपंच बाबूलाल गमेती को वार्ड नंबर 79 से टिकट दिया गया है। सापेटिया सरपंच पुष्करलाल के बेटे योगेश पुष्कर्णा को वार्ड नंबर 80 से मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा उप सरपंच रमेश डांगी को भी टिकट दिया गया है। वार्ड नंबर 66 से कांग्रेस ने सत्येंद्र को उम्मीदवार बनाया है। बताया जा रहा है कि सत्येंद्र पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं। अब आपको बताते हैं उदयपुर नगर निगम के लिए कांग्रेस के सभी 80 प्रत्याशियों की पूरी सूची

कुल मिलाकर उदयपुर नगर निगम की इस सूची में कांग्रेस ने पुराने अनुभव, युवा चेहरों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। लेकिन टिकट मिलने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती बागियों को रोकने और सभी उम्मीदवारों को एकजुट रखने की होगी… क्योंकि निकाय चुनाव में स्थानीय समीकरण, व्यक्तिगत पकड़ और वार्ड स्तर की राजनीति बेहद अहम होती है। अब देखना होगा कि कांग्रेस की ये 80 उम्मीदवारों वाली टीम उदयपुर नगर निगम में पार्टी के लिए कितना मजबूत प्रदर्शन करती है और टिकट कटने वाले नेताओं का अगला कदम क्या रहता है।
