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‘वंदे मातरम’ को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश से लेकर केरल तक बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कांग्रेस पर हमले के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीति करने और जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।

बीजेपी ने कांग्रेस के रुख को वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए पलटवार किया है। वहीं, केरल में बीजेपी ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ को कथित तौर पर शामिल नहीं किए जाने के विरोध में सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया है।

जयराम रमेश बोले- बीजेपी कर रही दिखावे का राष्ट्रवाद

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में ‘वंदे मातरम’ को लेकर चर्चा हुई थी। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के पुराने रुख को स्पष्ट किया है।

रमेश के अनुसार, कांग्रेस 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा पारित प्रस्ताव को मानती है। उन्होंने कहा कि उस प्रस्ताव से स्वतंत्रता आंदोलन के कई प्रमुख नेता जुड़े थे और इसे रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के आधार पर तैयार किया गया था।

जयराम रमेश ने बीजेपी नेताओं पर ‘दिखावटी राष्ट्रवाद’ की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐतिहासिक प्रस्ताव के अनुरूप ही अपनी स्थिति बनाए रखेगी।

1950 में ‘वंदे मातरम’ को मिली थी राष्ट्रीय गीत की पहचान

जयराम रमेश ने संविधान सभा के अंतिम सत्र का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, 25 जनवरी 1950 को राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘जन गण मन’ के मूल पांच अंतरों में से एक अंतरे को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया। कांग्रेस का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर पार्टी का वर्तमान रुख उस समय लिए गए ऐतिहासिक फैसलों और कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव से जुड़ा हुआ है।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राष्ट्रवाद, इतिहास और राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।