सितंबर में उज्जैन देश की युवा वैचारिक चेतना के बड़े केंद्र के रूप में सामने आएगा। यहां 24 राज्यों से 1700 से अधिक युवा एकत्र होंगे और धर्म, राष्ट्र, संस्कृति, शिक्षा, विज्ञान तथा समकालीन जीवन की चुनौतियों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। अवसर होगा युवा धर्म संसद-2026 के षष्ठम अंक का, जिसका आयोजन सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा 17 से 19 सितंबर तक गीता भवन, उज्जैन में किया जाएगा।

भाषण तक सीमित नहीं रहेगा आयोजन, सवालों के जरिए होगा संवाद

आयोजन में विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षाविद्, संत, मनीषी और सामाजिक चिंतक शामिल होंगे। संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज के मार्गदर्शन में कार्यक्रम की शुरुआत 17 सितंबर को प्रदर्शनी के उद्घाटन और युवा पंचायत से होगी।

प्रदर्शनी में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, दर्शन, शिक्षा और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं युवा पंचायत में देशभर से आए युवाओं को अपने सवाल, अनुभव और विचार रखने का अवसर मिलेगा। 18 और 19 सितंबर को मुख्य व्याख्यान, प्रश्नोत्तर और संवाद सत्र आयोजित होंगे, जिनमें विशेषज्ञ सीधे युवाओं से संवाद करेंगे।

युवा धर्म संसद की सबसे खास बात इसका संवाद आधारित स्वरूप होगा। युवाओं को केवल वक्ताओं को सुनने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि वे धर्म, आधुनिकता, विज्ञान, शिक्षा, राष्ट्र और सामाजिक जीवन से जुड़े सवाल सीधे विद्वानों और संतों के सामने रख सकेंगे।

काशी, अयोध्या से अब उज्जैन तक पहुंची वैचारिक यात्रा

युवा धर्म संसद की परंपरा देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों तक पहुंच चुकी है। इससे पहले काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम् में इसके आयोजन हो चुके हैं। अब इसके छठे अंक के लिए उज्जैन को चुना गया है।

उज्जैन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि भी रहा है। ज्योतिष, गणित, साहित्य, दर्शन और संस्कृत से इसका गहरा संबंध रहा है। विक्रमादित्य की नगरी और सिंहस्थ की भूमि के रूप में भी उज्जैन की विशेष सांस्कृतिक पहचान है।

आयोजकों के अनुसार, संसद में धर्म को केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड तक सीमित न रखते हुए व्यक्ति, समाज, प्रकृति और समूची सृष्टि के प्रति कर्तव्य, उत्तरदायित्व, सदाचार और लोकमंगल की जीवन-दृष्टि के रूप में समझने पर चर्चा होगी।

तकनीक, वैश्वीकरण, शिक्षा, रोजगार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक उत्तरदायित्व और बदलती जीवनशैली के बीच युवाओं के सामने खड़ी नई चुनौतियों पर भी विचार होगा। चर्चा का उद्देश्य यह समझना होगा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन जीवन-दृष्टि इन आधुनिक चुनौतियों को समझने और समाधान तलाशने में किस तरह उपयोगी हो सकती है।

आयोजन की प्रमुख जानकारी:

  • 17 सितंबर: प्रदर्शनी का उद्घाटन और युवा पंचायत
  • 18-19 सितंबर: व्याख्यान, प्रश्नोत्तर और संवाद सत्र
  • सहभागिता: 24 राज्यों से 1700 से अधिक युवा
  • स्थान: गीता भवन, उज्जैन
  • आयोजक: सेवाज्ञ संस्थानम्

पंजीकरण: युवा धर्म संसद-2026 में केवल पंजीकृत युवा ही शामिल हो सकेंगे। इच्छुक विद्यार्थी और युवा सेवाज्ञ संस्थानम् की वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं।