ट्रंप के Air Force One पर मंडराया मिसाइल का खतरा

जुलाई 2026 में तुर्की की राजधानी अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद गंभीर स्थिति सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मेलन के आखिरी दिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली कि ट्रंप के विमान Air Force One को शोल्डर-फायर्ड मिसाइल यानी कंधे से दागी जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से खतरा हो सकता है।

खतरे को गंभीर मानते हुए अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप को Air Force One से हटाकर एक छोटे सरकारी विमान में भेजने का फैसला किया। पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई, ताकि राष्ट्रपति की वास्तविक गतिविधियों का पता न चल सके।

कैटरिंग ट्रक की आड़ में बदला गया विमान

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और उनके कुछ करीबी सहयोगी बड़े नीले-सफेद Air Force One से उतरे और बिना किसी खास पहचान वाले C-32A सरकारी जेट में सवार हो गए। वहीं Air Force One को बाद में अलग से रवाना किया गया, जिसमें दूसरे अधिकारी और मीडिया के लोग मौजूद थे। राष्ट्रपति की आवाजाही को छिपाने के लिए सामान्य दिखने वाले वाहनों का भी इस्तेमाल किया गया। बताया गया कि इस पूरी प्रक्रिया में कैटरिंग ट्रक जैसी गाड़ियों की आड़ ली गई, ताकि सुरक्षा ऑपरेशन पर किसी का ध्यान न जाए।

ईरान से बढ़ते तनाव के बीच सामने आया खतरा

यह मामला ऐसे समय सामने आया जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को कई स्रोतों से जानकारी मिली थी कि राष्ट्रपति के विमान के लिए मिसाइल खतरा मौजूद है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि NATO सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति को शोल्डर-फायर्ड मिसाइल के साथ देखा गया था। इसके अलावा ईरानी पक्ष को ट्रंप के ठहरने की जगह की बेहद सटीक जानकारी होने की बात भी सामने आई। ऐसे हालात में सुरक्षा एजेंसियों ने जोखिम नहीं लेने का फैसला किया और राष्ट्रपति के लिए अलग विमान का इस्तेमाल किया।

ट्रंप के Air Force One पर मंडराया मिसाइल का खतरा, गुपचुप बदला गया विमान

आखिर MANPADS क्या होते हैं?

शोल्डर-फायर्ड मिसाइल सिस्टम को आम तौर पर MANPADS यानी Man-Portable Air Defense Systems कहा जाता है। इन्हें एक व्यक्ति या छोटी टीम आसानी से इस्तेमाल कर सकती है। इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये छोटे, हल्के और आसानी से छिपाए जा सकते हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाली कई मिसाइलें विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी को पहचानकर लक्ष्य तक पहुंचती हैं। इन मिसाइलों में एक्टिव रडार नहीं होने के कारण इन्हें पहले से पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान बड़े विमान ज्यादा संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उस समय उनकी ऊंचाई और गति अपेक्षाकृत कम होती है।

358 मिसाइल का भी सामने आया नाम

इस पूरे मामले में जिस मिसाइल का जिक्र किया गया, उसे लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। मूल रिपोर्ट में ईरानी SA-67 का नाम सामने आया था। इसे 358 मिसाइल या Saqr-1 के नाम से भी जाना जाता है। यह सामान्य कंधे से दागी जाने वाली MANPADS मिसाइल से अलग तरह का सिस्टम है। इसे एक तरह की loitering surface-to-air missile के रूप में बताया जाता है। यानी लॉन्च होने के बाद यह कुछ समय तक इलाके में घूम सकती है और लक्ष्य मिलने पर हमला कर सकती है।

इसकी खासियत इसका पैसिव गाइडेंस सिस्टम बताया जाता है, जिसमें यह खुद लगातार रडार सिग्नल प्रसारित नहीं करती। यही वजह है कि ऐसे सिस्टम को पहचानना और उससे निपटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि इसकी गति तेज लड़ाकू विमानों की तुलना में कम बताई जाती है, इसलिए इसे धीमी गति वाले विमानों, हेलिकॉप्टर और ड्रोन जैसे लक्ष्यों के खिलाफ ज्यादा प्रभावी माना जाता है।

रूस का Verba MANPADS कितना खास है?

दूसरा सिस्टम रूस का 9K333 Verba है, जिसे NATO में SA-29 Gizmo कहा जाता है। यह रूस की चौथी पीढ़ी का MANPADS है और पुराने Igla सिस्टम का उन्नत रूप माना जाता है। Verba की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टी-स्पेक्ट्रल सीकर है। इसमें अल्ट्रावायलेट, नियर-इन्फ्रारेड और मिड-इन्फ्रारेड सेंसर काम करते हैं। ये अलग-अलग सेंसर से मिली जानकारी को मिलाकर वास्तविक विमान और भ्रम पैदा करने वाले डिकॉय के बीच अंतर करने की कोशिश करते हैं। इसकी वजह से यह आधुनिक काउंटरमेजर्स के खिलाफ पहले की तुलना में ज्यादा सक्षम माना जाता है। Verba का इस्तेमाल विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन जैसे लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक सैनिक भी इसे संचालित कर सके।

Air Force One के लिए खतरा क्यों गंभीर है?

Air Force One दुनिया के सबसे सुरक्षित विमानों में गिना जाता है और अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए इसके साथ कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था रहती है। इसके बावजूद छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले मिसाइल सिस्टम एक अलग तरह की चुनौती पैदा करते हैं। खासकर किसी एयरपोर्ट के आसपास या टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विमान की स्थिति पर सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा सतर्क रहना पड़ता है। अंकारा की घटना ने एक बार फिर दिखाया कि आधुनिक युद्ध में खतरा सिर्फ बड़ी और लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं आता। छोटे, मोबाइल और आसानी से छिपाए जा सकने वाले एयर डिफेंस सिस्टम भी बेहद गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकते हैं।

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