सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू की गई अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 27 दिन बाद समाप्त कर दी। NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन को देशभर के छात्रों और युवाओं का व्यापक समर्थन मिला। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां जेपी नड्डा ने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।
सरकार के लिखित आश्वासन के बाद लिया फैसला
शुक्रवार सुबह जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। इस दौरान उनकी प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई और सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।
किन 3 मांगों पर बनी सहमति?
सरकार ने जिन तीन मुद्दों पर लिखित आश्वासन दिया है, उनमें शामिल हैं:
प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जाएगी।
पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।
क्या थीं सोनम वांगचुक की प्रमुख मांगें?
सोनम वांगचुक 28 जून को छात्रों के आंदोलन से जुड़े थे। उन्होंने NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
उनकी प्रमुख मांगें थीं:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच।
दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई।
परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करना।
छात्र आत्महत्या के मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा देना।
पहले भी कर चुके हैं लंबा अनशन
यह सोनम वांगचुक का पहला अनशन नहीं है। इससे पहले मार्च 2024 में उन्होंने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय युवाओं के रोजगार की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर 21 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। इसके बाद सितंबर 2024 में उन्होंने “दिल्ली चलो” पदयात्रा भी शुरू की थी। हालांकि, दिल्ली सीमा पर पहुंचने से पहले उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।
