मार्च 2026 के मध्य में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है और दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस समय दुनिया तीन बड़े संघर्षों के कारण अस्थिर स्थिति में खड़ी नजर आ रही है। पहला मोर्चा रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध है, जो अब पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। दूसरा मोर्चा मध्य पूर्व में अमेरिका और इजराइल बनाम ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव है, जबकि तीसरा और नया मोर्चा दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों से जुड़ा है। पूर्व नाटो कमांडरों और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये तीनों संकट एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो वैश्विक युद्ध की संभावना पैदा हो सकती है। हाल ही में दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में हजारों चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं की असामान्य गतिविधियां देखी गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये नौकाएं चीन की मैरीटाइम मिलिशिया का हिस्सा हो सकती हैं, जिनका उपयोग रणनीतिक सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। उधर मध्य पूर्व में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खर्ग द्वीप पर किए गए हमलों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। खर्ग ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है और यहां से लगभग 90 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इसी बीच रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोप में भी तनाव बरकरार है। यदि रूस और नाटो के बीच सीधा टकराव होता है या दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और चीन के बीच नौसैनिक संघर्ष छिड़ता है, तो यह वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में दुनिया बेहद नाजुक संतुलन पर खड़ी है और किसी भी छोटी चूक से क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक युद्ध में बदल सकता है।
यूक्रेन युद्ध, ईरान संकट और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों ने वैश्विक तनाव बढ़ाया 