HARIDWAR: स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी की समाधि मंदिर का भव्य लोकार्पण
हरिद्वार के पावन धाम में आज एक ऐतिहासिक धार्मिक-सांस्कृतिक समारोह आयोजित हुआ। जूना पीठाधीश्वर पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य में भारत माता मंदिर के संस्थापक, ब्रह्मलीन पूज्यपाद स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की समाधि मंदिर का लोकार्पण एवं श्री विग्रह मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई। यह आयोजन सनातन धर्म के गौरवशाली इतिहास और परंपरा को समर्पित था, जिसमें देश के उच्च पदस्थ नेतागण, संत समाज और लाखों भक्तों ने शिरकत की। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पूज्य स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज सहित अनेक धर्माचार्य उपस्थित रहे।
समारोह की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और भव्य शोभायात्रा से हुई। हरिद्वार के हृद्वार घाट से निकली यह यात्रा भारत माता मंदिर पहुंची, जहां पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के मार्गदर्शन में समाधि मंदिर का विधिवत् लोकार्पण किया गया। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज सनातन धर्म के प्रखर प्रचारक और भारत माता मंदिर के संस्थापक थे। उनका निधन सनातन परंपराओं को मजबूत करने के उनके अतुलनीय योगदान को अमर बना गया। यह मंदिर उनके जीवन दर्शन और राष्ट्रभक्ति को चिरस्मरणीय बनाने का प्रतीक बनेगा। मूर्ति स्थापना के दौरान पंचामृत स्नान, आरती और महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित सभी ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “पूज्य स्वामी जी सनातन संवेदनाओं के संरक्षक और ध्वजवाहक थे। सन 1979 में उनके दैवीय सान्निध्य का प्रभाव ही था कि मैं 1980 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रचारक बन सका और राष्ट्र-समाज के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर पाया।” मनोहर लाल ने स्वामी जी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन को अपनी राजनीतिक-सामाजिक यात्रा का आधार बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्रप्रेम का आदर्श है, जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद जी का योगदान अखिल भारतीय स्तर पर फैला हुआ था। राम मंदिर आंदोलन से लेकर सांस्कृतिक पुनरुत्थान तक उनके प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की धार्मिक स्थलों के विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हरिद्वार जैसे तीर्थराज को और भव्य बनाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी जी को “सनातन धर्म के सच्चे सिपाही” बताते हुए कहा कि उनकी समाधि मंदिर उत्तर भारत के सांस्कृतिक एकीकरण का प्रतीक बनेगा। उन्होंने भारत माता मंदिर को पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयोजन को राज्य की धार्मिक विरासत से जोड़ा। उन्होंने कहा, “हरिद्वार गंगा का द्वार है, और यह मंदिर सनातन मूल्यों का नया अध्याय लिखेगा।” श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज ने स्वामी सत्यमित्रानंद जी के साथ अपने लंबे संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी राम मंदिर निर्माण के प्रारंभिक चरण से जुड़े रहे और अयोध्या आंदोलन में सक्रिय थे। संत समाज ने सामूहिक रूप से स्वामी जी के जीवन पर आधारित प्रकाशन जारी किए और भविष्य के धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई।
यह आयोजन केवल लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम में सनातन धर्म की एकता पर जोर दिया गया। पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद जी का संदेश था “भारत माता की जय”। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ें। लाखों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, लेकिन उनका जीवन तप और सेवा से भरा था। भारत माता मंदिर की स्थापना 1990 के दशक में की, जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। आज का लोकार्पण उनके विरासत को जीवंत करता है। राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति से यह सनातन उत्थान का संदेश देता है। राजस्थान से उत्तराखंड तक सांस्कृतिक पुल बनेगा। भविष्य में यह मंदिर तीर्थयात्रियों का प्रमुख केंद्र बनेगा।

