RSS lobbying in America: RSS पर लगे अमेरिका में लॉबिंग करने के गंभीर आरोपRSS lobbying in America: RSS पर लगे अमेरिका में लॉबिंग करने के गंभीर आरोप

RSS lobbying in America: RSS पर लगे अमेरिका में लॉबिंग करने के गंभीर आरोप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अमेरिका में लॉबिंग से जुड़े हालिया आरोपों को लेकर दो टूक और विस्तृत सफाई दी है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने स्पष्ट कहा है कि RSS ने न तो अमेरिका में किसी लॉबिंग फर्म, पब्लिक रिलेशंस (PR) एजेंसी या संगठन को नियुक्त किया है और न ही किसी तरह का भुगतान किया है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और भ्रामक बताया।

सुनील आंबेकर ने एक मीडिया समूह को दिए इंटरव्यू में कहा कि RSS मूल रूप से भारत का एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जिसका उद्देश्य समाज में राष्ट्रभाव, सेवा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि संघ का अमेरिका या किसी अन्य देश में किसी भी प्रकार का औपचारिक या अनौपचारिक लॉबिंग नेटवर्क नहीं है और न ही उसका मकसद किसी विदेशी देश की नीतियों, कानूनों या द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करना है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका में हाल के दिनों में जिस गतिविधि को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह RSS द्वारा संचालित या निर्देशित नहीं थी। आंबेकर के अनुसार, वर्ष 2024 में अमेरिका में रह रहे हिंदू समुदाय के कुछ प्रमुख व्यक्तियों और सामाजिक नेताओं ने, जो RSS से स्वतंत्र हैं, एक जागरूकता अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का उद्देश्य भारत और हिंदू समुदाय से जुड़े विषयों पर सही, तथ्यात्मक और संतुलित जानकारी साझा करना था, ताकि गलत धारणाओं और अपुष्ट सूचनाओं का खंडन किया जा सके।

सुनील आंबेकर ने बताया कि इस पहल के अंतर्गत RSS द्वारा भारत में किए जा रहे कार्यों से जुड़ी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी भी साझा की गई। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आपदा राहत, सामाजिक सेवा और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्रों में RSS और उससे प्रेरित संगठनों की भूमिका से संबंधित तथ्य शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है और इसे किसी गोपनीय या विशेष उद्देश्य से साझा नहीं किया गया।

संघ प्रचार प्रमुख के अनुसार, इस जागरूकता अभियान के दौरान हिंदू समुदाय के कुछ नेताओं ने अपनी स्वतंत्र पहल पर अमेरिका स्थित One+ Strategies नाम की एक PR फर्म से संपर्क किया। बाद में इस PR फर्म ने अंतरराष्ट्रीय लॉ फर्म Squire Patton Boggs (SPB) को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा। अमेरिकी कानूनों के तहत, यदि किसी गतिविधि में नीति निर्माताओं या सरकारी संस्थानों के साथ संवाद शामिल होता है, तो लॉबिंग डिस्क्लोजर एक्ट (LDA) के अंतर्गत पंजीकरण अनिवार्य हो जाता है।

सुनील आंबेकर ने कहा कि इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत LDA रजिस्ट्रेशन किया गया, जिसमें “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” का उल्लेख एक विषय या संदर्भ के रूप में किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रजिस्ट्रेशन का मतलब यह नहीं है कि RSS ने किसी प्रकार का अनुबंध किया हो, धनराशि का भुगतान किया हो या किसी भी गतिविधि का निर्देश दिया हो। RSS का इस प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तीय संबंध नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत में RSS ने किसी भी अमेरिकी लॉबिंग या एडवोकेसी फर्म को भुगतान नहीं किया है।” आंबेकर ने यह भी जोड़ा कि RSS की भूमिका केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध, तथ्यात्मक जानकारी साझा करने तक सीमित रही है और उससे आगे किसी प्रकार की कोई रणनीतिक या राजनीतिक पहल नहीं की गई।

सुनील आंबेकर ने यह भी कहा कि अमेरिका में शुरू की गई यह पूरी पहल स्वैच्छिक थी और इसमें शामिल लोग अपने व्यक्तिगत और सामुदायिक दायित्व के तहत काम कर रहे थे। उनके अनुसार, यह गतिविधि सद्भावना से प्रेरित थी और पूरी तरह अमेरिकी कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुरूप थी। RSS का इससे कोई संगठनात्मक नियंत्रण या संचालन संबंध नहीं था।

संघ ने इस मुद्दे पर मीडिया से भी अपील की है कि तथ्यों की पूरी जांच और पुष्टि किए बिना किसी तरह के आरोप न लगाए जाएं। सुनील आंबेकर ने कहा कि RSS की भूमिका को गलत तरीके से प्रस्तुत करने से न केवल संगठन की छवि प्रभावित होती है, बल्कि समाज में अनावश्यक भ्रम और अविश्वास भी पैदा होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि RSS हमेशा पारदर्शिता और सत्य के पक्ष में रहा है और भविष्य में भी किसी भी प्रकार के सवाल या संदेह पर तथ्यात्मक जानकारी देने के लिए तैयार है।