संस्कारों के साथ मनाया गया स्वामी श्रद्धानंद का 99वां बलिदान दिवस
आर्य समाज के महान संन्यासी, शिक्षाविद और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी श्रद्धानंद का 99वां बलिदान दिवस आर्य केंद्रीय सभा, फरीदाबाद (पंजी.) द्वारा अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और वैदिक वातावरण में मनाया गया।
कार्यक्रम का आयोजन महात्मा हंसराज सभागार, डीएवी स्कूल, सेक्टर-14, फरीदाबाद में किया गया, जहां यज्ञ, भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विचार-गोष्ठी के माध्यम से स्वामी श्रद्धानंद के जीवन, संघर्ष और योगदान को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ ब्रह्मा हरिओम शास्त्री द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न यज्ञ से हुआ। यज्ञ के माध्यम से राष्ट्र, समाज और मानवता के कल्याण की कामना की गई। इसके उपरांत आचार्य सतीश सत्यम् एवं आचार्य धर्मवीर सात्विक ने अपने भजनों के माध्यम से सभागार को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।
कार्यक्रम में श्री थारू राम आर्य कन्या उच्चतम विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन, शिक्षा आंदोलन और शुद्धि आंदोलन को प्रभावशाली ढंग से मंच पर जीवंत कर दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षा विमला ग्रोवर की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि हरियाणा सरकार के मंत्री राजेश नागर का आर्य पट्टिका पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
मुख्य अतिथि राजेश नागर ने अपने संबोधन में कहा कि, महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज ने समाज को नई दिशा दी और उनके अनन्य अनुयायी स्वामी श्रद्धानंद ने उन विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि, स्वामी श्रद्धानंद न केवल एक महान शिक्षाविद थे, बल्कि वे स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक सेनानी और सामाजिक सुधारक भी थे।
उन्होंने कहा कि, मुंशी राम से स्वामी श्रद्धानंद बनने तक की जीवन यात्रा त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा का अद्भुत उदाहरण है, जो आज की युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है।
डीएवी स्कूल सेक्टर-14 की प्रधानाचार्या अनीता गौतम ने अपने उद्बोधन में कहा कि, डीएवी संस्थान बच्चों को आर्य समाज के सिद्धांतों के अनुरूप धर्म, विद्या और परोपकार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है, ताकि वे देश और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बन सकें।
कार्यक्रम में उपस्थित न्यायाधीश सत्यभूषण आर्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती एवं स्वामी श्रद्धानंद के सामाजिक और धार्मिक योगदान को याद करते हुए कहा कि, अगर हम उनके बताए मार्ग पर चलें, तो न केवल अपना जीवन सफल बना सकते हैं, बल्कि समाज को भी नई दिशा दे सकते हैं।
मुख्य वक्ता स्वामी सच्चिदानंद ने अपने विचार रखते हुए कहा कि, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती और उनके प्रमुख अनुयायी स्वामी श्रद्धानंद के कार्य आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि, गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना कर स्वामी श्रद्धानंद ने वैदिक शिक्षा को नई पहचान दी और जीवनभर शिक्षा, समाज सुधार एवं राष्ट्र निर्माण के लिए अपना तन-मन-धन समर्पित कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में आर्य केंद्रीय सभा, फरीदाबाद के प्रधान प्रेम कुमार मित्तल, वरिष्ठ उपप्रधान रघुवीर शास्त्री, मंत्री दयानंद सेठी, कोषाध्यक्ष अशोक गर्ग सहित अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर देशबंधु आर्य, दासराम आर्य, सुशील शास्त्री, विद्याभूषण आर्य, वसु मित्र सत्यार्थी, जितेंद्र सरल, प्रवीण गोयल, संजय खट्टर सहित विभिन्न आर्य समाजों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

