Storyteller Indresh Upadhyay: कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने दिया विवादित बयान
मथुरा में प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश महाराज के एक कथित बयान को लेकर विवाद गहरा गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में इंद्रेश महाराज यादव समाज और यदुवंश को लेकर टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वे कहते हैं कि यादव यह सोचते हैं कि वे भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं, जबकि ऐसा नहीं है। उनके अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के समय संपूर्ण यदुवंश का नाश हो गया था और यदुवंशी शेष नहीं बचे।
इंद्रेश महाराज के इस बयान के सामने आने के बाद मथुरा सहित ब्रज क्षेत्र में यादव समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह वीडियो कब और कहां का है, लेकिन इसके वायरल होने के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। यादव समाज ने इस बयान को उनकी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान पर सीधा हमला बताया है।
वीडियो में इंद्रेश महाराज यह भी कहते सुने जा रहे हैं कि यादव और यदुवंशी अलग-अलग हैं। उनके अनुसार यादव समाज एक अलग वर्ग है, जबकि जिस यदुवंश में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ, वह अलग था। कथावाचक का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण के जाने के बाद यदुवंशी शेष नहीं बचे और यदि दो-चार लोग बचे भी होंगे तो उनके वंशज जादौन कहलाए, जिन्हें यदुवंश से जोड़ा जा सकता है।
इस बयान के विरोध में सोमवार को अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा ने मथुरा में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। महासभा के जिलाध्यक्ष संजय यादव ने इंद्रेश महाराज के बयान की कड़ी निंदा की और इसे समाज को बांटने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं यदुवंश में अवतरित हुए थे और यह तथ्य पुराणों, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट रूप से वर्णित है।
संजय यादव ने कहा कि यादव समाज की पहचान केवल सामाजिक नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक भी है। ऐसे में किसी भी कथावाचक द्वारा मंच से इस प्रकार के बयान देना न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है। उन्होंने मांग की कि इंद्रेश महाराज अपने बयान पर यादव समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
यादव महासभा के जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि इंद्रेश महाराज अपने दावे पर कायम हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। बिना प्रमाण इस तरह के बयान देना स्वीकार्य नहीं है। संजय यादव ने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो यादव समाज लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से उनके खिलाफ आंदोलन करेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यादव समाज के नेताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का यदुवंश से संबंध भारतीय संस्कृति और जनमानस में गहराई से स्थापित है। इसे लेकर किसी तरह का संदेह या भ्रम फैलाना समाज में तनाव और विभाजन पैदा कर सकता है। उन्होंने सभी धर्माचार्यों और कथावाचकों से अपील की कि वे कथा-वाचन के दौरान शास्त्रों, इतिहास और सामाजिक समरसता का ध्यान रखें।
इस विवाद के बीच कथावाचक अनिरुद्धाचार्य द्वारा पूर्व में दिए गए एक बयान का भी जिक्र किया जा रहा है। अनिरुद्धाचार्य ने अपनी कथा में कहा था कि जब भगवान श्रीकृष्ण धरती से प्रस्थान करने लगे, तब 56 करोड़ यदुवंशी उनके साथ चले गए थे। उनके अनुसार इसके बाद भी वज्रनाभ जीवित रहे, और आज धरती पर मौजूद यादव समाज को वज्रनाभ का वंशज माना जाता है। इस आधार पर उन्होंने यादवों को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज बताया था।
यादव समाज के लोगों का कहना है कि अलग-अलग कथावाचकों के परस्पर विरोधी बयानों से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उनका मानना है कि धार्मिक मंचों से दिए गए वक्तव्यों का व्यापक असर होता है, इसलिए वक्ताओं को अतिरिक्त जिम्मेदारी और सावधानी बरतनी चाहिए।
फिलहाल इंद्रेश महाराज की ओर से इस विवाद पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं यादव समाज इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और आगे की रणनीति पर विचार कर रहा है। विवादित वीडियो की प्रामाणिकता, समय और स्थान को लेकर भी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आ सकी है, लेकिन इसके बावजूद यह मुद्दा धार्मिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।

