Political battle over Nitish Kumar hijab controversy: नीतीश कुमार के हिजाब विवाद पर सियासी संग्राम
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद देश की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में नीतीश कुमार एक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला का हिजाब हटाते या खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया है और इसे महिला की गरिमा व धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने भी इस व्यवहार की आलोचना की है।
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। जहां एक ओर विपक्ष ने नीतीश कुमार के व्यवहार को असंवेदनशील और आपत्तिजनक बताया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री का बचाव किया है। इस समर्थन ने विवाद को और गहरा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी से इससे बेहतर की उम्मीद नहीं की जा सकती।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बीजेपी के कुछ नेता बिहार के मुख्यमंत्री और अपने सहयोगी नीतीश कुमार के मुखर समर्थक रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यही घटना किसी और धार्मिक समुदाय की महिला के साथ हुई होती, तो क्या प्रतिक्रिया ऐसी ही होती। उमर अब्दुल्ला ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर उन्होंने हरियाणा या राजस्थान में किसी हिंदू महिला का घूंघट उठाया होता, तो क्या बीजेपी इसी तरह उसका बचाव करती।
उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी मुस्लिम पुरुष ने किसी हिंदू महिला का घूंघट हटाया होता, तो पूरे देश में कितना बड़ा हंगामा खड़ा हो जाता। उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि चूंकि महिला मुस्लिम है, इसलिए बीजेपी इस मामले में अलग रवैया अपना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के दोहरे मापदंडों से ज्यादा उम्मीद बीजेपी से की भी नहीं जा सकती।
इस विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई महिला अपॉइंटमेंट लेटर लेने जाती है, तो क्या उसे अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्या यह कोई इस्लामिक देश है, जहां चेहरा दिखाने पर सवाल उठाया जाए।
गिरिराज सिंह ने आगे उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई पासपोर्ट बनवाने या एयरपोर्ट पर जाता है, तब भी पहचान के लिए चेहरा दिखाना पड़ता है। उनकी इस तुलना को कई लोगों ने अनुचित और असंवेदनशील बताया। विवाद तब और बढ़ गया जब मीडिया द्वारा यह पूछे जाने पर कि अगर लड़की फिर भी नौकरी लेने से मना कर दे, तो क्या होगा, इस पर गिरिराज सिंह ने कहा, “वह मना करे या जहन्नुम में जाए।” इस बयान के बाद माफी की मांग तेज हो गई।
गिरिराज सिंह से पहले एनडीए के सहयोगी दल निषाद पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद भी नीतीश कुमार का बचाव करते हुए विवादों में आ गए थे। एक स्थानीय न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान संजय निषाद ने बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार भी इंसान हैं और नकाब छू जाने पर इतना बवाल खड़ा कर दिया गया।
संजय निषाद ने यह भी कहा था कि अगर कहीं और छू दिया होता, तो क्या हो जाता। उनकी इस टिप्पणी ने व्यापक आक्रोश पैदा किया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। बयान के बाद दबाव बढ़ने पर संजय निषाद ने सफाई देते हुए कहा कि उनके क्षेत्रीय लहजे के कारण उनकी बातों को गलत समझा गया है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सम्मान, धार्मिक पहचान और सत्ता में बैठे लोगों के व्यवहार पर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। कई लोग इसे सत्ता के अहंकार और अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदनशीलता की कमी के रूप में देख रहे हैं।
विपक्षी दलों का कहना है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि सार्वजनिक मंच पर किसी महिला के पहनावे को लेकर हस्तक्षेप करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी उल्लंघन है। वहीं, समर्थक इसे औपचारिक प्रक्रिया और पहचान से जोड़कर देख रहे हैं।
यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने राजनीतिक बयानबाजी, धार्मिक पहचान और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अलग-अलग दलों के नेताओं की टिप्पणियों ने विवाद को और व्यापक बना दिया है और देश की राजनीति में एक नया तनाव पैदा कर दिया है।

