VOICE OF RAJASHTAN: RAJASHTAN की आवाज कैसे बने हुनमान बेनीवाल ?VOICE OF RAJASHTAN: RAJASHTAN की आवाज कैसे बने हुनमान बेनीवाल ?

VOICE OF RAJASHTAN: RAJASHTAN की आवाज कैसे बने हुनमान बेनीवाल ?

राजस्थान की राजनीति में अगर कोई नेता बिना डरे, बिना झुके सीधी बात करता है… तो वो नाम है, हनुमान बेनीवाल। कभी सत्ता के साथ, तो ज़्यादातर सत्ता के खिलाफ। हनुमान बेनीवाल का जन्म नागौर ज़िले के एक किसान परिवार में हुआ। वे जाट समुदाय से आते हैं, जहां राजनीति, संघर्ष और सामाजिक चेतना घर-घर में चर्चा का विषय रही है। उनकी पहचान शुरू से ही एक ग्राउंड लेवल नेता की रही, जो मंच से ज़्यादा सड़क पर दिखता है।

हनुमान बेनीवाल ने राजनीति की शुरुआत छात्र राजनीति से की। कॉलेज के दिनों में ही वे अन्याय के खिलाफ खुलकर बोलने लगे। यहीं से उनका स्वभाव साफ दिखा… न कोई झिझक, न कोई डर।

साल 2008 में हनुमान बेनीवाल नागौर से विधायक बने। इसके बाद 2013 में भी जीत दर्ज की। उस समय वे बीजेपी से जुड़े हुए थे। लेकिन सत्ता में रहते हुए भी उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ कई बार सवाल खड़े किए। यही वजह बनी, पार्टी से टकराव की।

जब बीजेपी से मतभेद बढ़े, तो हनुमान बेनीवाल ने सीधा फैसला लिया… अपनी अलग पार्टी साल 2018 में बना ली… राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी के RLP… नारा साफ था…. किसान, जवान और नौजवान।

साल 2018 विधानसभा चुनाव…          RLP ने सीमित सीटों पर चुनाव लड़ा, खुद बेनीवाल खींवसर से विधायक बने…. 2019 लोकसभा चुनाव, RLP ने बीजेपी से गठबंधन किया…और हनुमान बेनीवाल नागौर से सांसद बने… भारी अंतर से जीत के बाद राष्ट्रीय पहचान मिली…

वहीं, 2023 विधानसभा चुनाव में RLP को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, कई सीटों पर हार, लेकिन राजनीतिक मौजूदगी बनी रही…

हनुमान बेनीवाल की पहचान,    आक्रामक भाषण,   तीखे शब्द,   सत्ता से सीधी टक्कर, बिना स्क्रिप्ट के बोलना, विधानसभा हो या संसद, वे सीधे अधिकारियों और मंत्रियों से भिड़ जाते हैं।

उनके बयान अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। कभी अफसरों पर हमला, कभी सरकार की नीतियों पर, कभी मुख्यमंत्री पर सीधा कटाक्ष… उनके समर्थक कहते हैं… “ये जनता की आवाज़ हैं।”

वहीं, आलोचक कहते हैं… “ये ज़्यादा आक्रामक हैं।”… लेकिन एक बात तय है, हनुमान बेनीवाल को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता…

आज के समय में हनुमान बेनीवाल राजस्थान सरकार को लगातार घेरते रहते हैं…

  • किसानों के मुद्दे

  • भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक

  • बेरोज़गारी

  • कानून व्यवस्था

मुख्यमंत्री पर वे अक्सर तीखे तंज कसते हैं। उनका कहना साफ है, “मैं सत्ता में रहूँ या नहीं, आवाज़ उठाता रहूँगा।”

समर्थकों के लिए हनुमान बेनीवाल… किसान नेता, जाट समाज की आवाज़, सिस्टम से लड़ने वाला नेता हैं…

जबिक विरोधियों के लिए, विवादित,  उग्र, और बेतुके बयानबाज़ हैं…

हनुमान बेनीवाल राजनीति के उस रास्ते पर हैं, जहां चुप रहना विकल्प नहीं। वे हारें या जीतें, लेकिन सवाल उठाना कभी नहीं छोड़ते। और शायद यही वजह है कि राजस्थान की राजनीति में उनका नाम हमेशा चर्चा में रहता है।

“कुछ नेता सत्ता के लिए राजनीति करते हैं, और कुछ राजनीति में रहकर सत्ता से लड़ते हैं।”