Priyanka Gandhi and Prashant Kishor met: प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की हुई मुलाकातPriyanka Gandhi and Prashant Kishor met: प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की हुई मुलाकात

Priyanka Gandhi and Prashant Kishor met: प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की हुई मुलाकात

हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई अटकलें तेज हो गई हैं। चुनाव में महागठबंधन के साथ-साथ प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में एक अहम मुलाकात की चर्चा सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले हफ्ते दिल्ली में चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के बीच मुलाकात हुई है। इस मुलाकात के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार में चुनावी झटके के बाद कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच फिर से संवाद की जमीन तैयार हो रही है।

सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात पूरी तरह अनौपचारिक थी और इसमें बिहार चुनाव में वोट कटने के मुद्दे पर चर्चा हुई। बिहार चुनाव के दौरान यह आरोप लगातार सामने आता रहा कि जन सुराज पार्टी की मौजूदगी से विपक्षी वोट बंटे, जिससे महागठबंधन को नुकसान हुआ। प्रशांत किशोर खुद भी चुनाव के बाद वोट कटने के मुद्दे को सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं। माना जा रहा है कि इसी संदर्भ में दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई।

हालांकि, कांग्रेस पार्टी इस मुलाकात को कोई राजनीतिक रंग देने के मूड में नहीं दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बातचीत को तूल नहीं देना चाहती, यही वजह है कि ऑफ रिकॉर्ड इस मुलाकात से प्रियंका गांधी इनकार करती नजर आ रही हैं। वहीं ऑन रिकॉर्ड उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। संसद परिसर में जब पत्रकारों ने प्रियंका गांधी से प्रशांत किशोर से मुलाकात को लेकर सवाल किया तो उन्होंने इसे टालते हुए कहा कि क्या यह कोई बड़ी खबर है।

प्रियंका गांधी ने सवालों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि देश में इतने बड़े मुद्दे हैं, जैसे वायु प्रदूषण, जिन पर कांग्रेस संसद में चर्चा की मांग कर रही है, लेकिन मीडिया इस तरह के सवाल पूछ रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को यह पूछना चाहिए कि मौजूदा मंत्री संसद की कार्यवाही में बाधा क्यों बन रहे हैं और सदन के अंदर क्या हो रहा है। उनके इस जवाब को मुलाकात से सीधे इनकार के बजाय राजनीतिक असहजता के तौर पर देखा जा रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव के करीब एक महीने बाद प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी की यह कथित मुलाकात हुई है। प्रशांत किशोर जन सुराज पार्टी के संस्थापक और प्रमुख हैं और उन्होंने इस चुनाव में बीजेपी और महागठबंधन, दोनों के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था। कांग्रेस महागठबंधन का अहम हिस्सा रही है, ऐसे में पीके और प्रियंका की मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

दोनों पक्षों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बातचीत को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि कुछ साल पहले कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच रिश्ते बेहद तल्ख हो गए थे। कांग्रेस से अलग होने के बाद प्रशांत किशोर लगातार पार्टी नेतृत्व और उसकी रणनीति की आलोचना करते रहे हैं। बिहार चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने कहा था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और राहुल गांधी का वोट चोरी अभियान राज्य में कोई बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं है।

प्रशांत किशोर और गांधी परिवार के बीच रिश्तों का इतिहास पुराना रहा है। एक समय वह कांग्रेस के प्रमुख राजनीतिक रणनीतिकारों में गिने जाते थे। बाद में उन्हें पार्टी में सक्रिय राजनीति में लाने की भी कोशिश हुई। वर्ष 2021 में, जेडीयू से निकाले जाने के एक साल बाद, प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को फिर से खड़ा करने को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया था और इस सिलसिले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से बातचीत भी हुई थी। हालांकि, उस समय दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस सहमति पर बात नहीं बन सकी।

इससे पहले प्रशांत किशोर ने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए रणनीति तैयार की थी, जहां पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के साथ काम किया, जहां पार्टी को बड़ी जीत हासिल हुई और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने। पंजाब में मिली सफलता के बाद प्रशांत किशोर का कद एक प्रभावी चुनावी रणनीतिकार के तौर पर और मजबूत हुआ।

बिहार चुनाव में हार के बाद प्रशांत किशोर की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जन सुराज पार्टी को जिस तरह का समर्थन मिलने की उम्मीद थी, वह नहीं मिल पाया। ऐसे में प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात को कुछ लोग भविष्य की संभावनाओं के संकेत के तौर पर देख रहे हैं, तो कुछ इसे केवल एक औपचारिक या मुद्दा-आधारित बातचीत मान रहे हैं।

इस मुलाकात ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या आने वाले समय में कांग्रेस और प्रशांत किशोर के रास्ते फिर से मिल सकते हैं या यह सिर्फ बिहार चुनाव के बाद के राजनीतिक मंथन का हिस्सा भर है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब कांग्रेस की रणनीति और प्रशांत किशोर के अगले कदम पर टिकी हुई है।