Sudhanshu Trivedi compared Congress to the Mughals: सुधांशु त्रिवेदी ने की कांग्रेस की मुगलों से तुलनाSudhanshu Trivedi compared Congress to the Mughals: सुधांशु त्रिवेदी ने की कांग्रेस की मुगलों से तुलना

Sudhanshu Trivedi compared Congress to the Mughals: सुधांशु त्रिवेदी ने की कांग्रेस की मुगलों से तुलना

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। रैली में कांग्रेस नेताओं के तीखे हमलों और कथित नारेबाज़ी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और नेहरू परिवार पर कड़ा पलटवार किया है। बीजेपी ने कांग्रेस की राजनीति और उसके नेतृत्व की तुलना मुगल शासकों से करते हुए भविष्य को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस और नेहरू परिवार की तुलना मुगल शासक बाबर के वंश से की। उन्होंने दावा किया कि जैसे मुगल साम्राज्य छठे शासक औरंगजेब के बाद पतन की ओर चला गया, वैसे ही राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का भी वही हाल होगा। त्रिवेदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रामलीला मैदान की ओर जाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते सुना गया

इन नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब कांग्रेस कार्यकर्ता प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हों। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां का अपमान करती रही है। त्रिवेदी ने कहा कि जब किसी राजनीतिक दल की सोच इस स्तर तक गिर जाए कि वह किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री के लिए कब्र खोदने जैसी बातें करे, तो उस दल का भविष्य खुद तय हो जाता है।

बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस पर मुस्लिम लीग और माओवादी एजेंडे पर चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी धीरे-धीरे अराजकता का मंच बनती जा रही है। उनके मुताबिक कांग्रेस की राजनीति अब लोकतांत्रिक मूल्यों से हटकर नफरत और अस्थिरता को बढ़ावा देने वाली हो गई है। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा और मानसिकता ही किसी पार्टी के पतन का कारण बनती है।

नेहरू परिवार और मुगल शासकों की तुलना करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मुगल साम्राज्य में बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब ने शासन किया और छठी पीढ़ी के शासन के बाद मुगल सत्ता समाप्त हो गई। इसी तरह कांग्रेस पर भी एक ही परिवार के कई सदस्यों का लंबे समय तक प्रभुत्व रहा है। त्रिवेदी के अनुसार मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी छठे ऐसे नेता हैं जो पार्टी में सत्ता का केंद्र बने हुए हैं।

बीजेपी नेता ने कहा कि जिस तरह मुगल साम्राज्य अपने आंतरिक विरोधाभासों और गलत नीतियों के कारण इतिहास बन गया, उसी तरह कांग्रेस भी अपनी भाषा, सोच और नेतृत्व के कारण राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता ऐसी बयानबाज़ी करते हैं, जो परिस्थितियां पैदा करती है और अंततः उन्हें इतिहास के पन्नों में दफन कर देती है।

उधर, कांग्रेस की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित रैली में बीजेपी पर लोकतंत्र को कमजोर करने और अवैध तरीकों से सत्ता में बने रहने के आरोप लगाए गए। रैली में देशभर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। मंच से कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम और संस्थानों की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए और बीजेपी पर चुनावी धांधली का आरोप लगाया

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी में हिम्मत है तो वह बैलेट पेपर से निष्पक्ष चुनाव लड़कर दिखाए। प्रियंका गांधी ने दावा किया कि निष्पक्ष चुनाव होने की स्थिति में बीजेपी कभी जीत नहीं पाएगी और यह बात खुद बीजेपी भी जानती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के हक और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करती रहेगी।

रैली के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग, विपक्षी नेताओं को दबाने और जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के आरोप भी लगाए। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा सरकार जनता के सवालों से बचने के लिए विपक्ष पर हमला कर रही है, जबकि देश में बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दे लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

रामलीला मैदान की इस रैली और उसके बाद आए बीजेपी के तीखे बयानों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिसमें इतिहास, परिवारवाद, लोकतंत्र और राजनीतिक मर्यादा जैसे मुद्दे केंद्र में आ गए हैं।