Pakistan is now on the verge of collapse: अब टूटने की कगार पर पहुंचा पाकिस्तानPakistan is now on the verge of collapse: अब टूटने की कगार पर पहुंचा पाकिस्तान

Pakistan is now on the verge of collapse: अब टूटने की कगार पर पहुंचा पाकिस्तान

पाकिस्तान में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के कथित ‘डिवाइड एंड फ्रैगमेंट’ प्लान को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ता जा रहा है। इस योजना के तहत पाकिस्तान को वर्तमान चार प्रांतों – पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा – से बढ़ाकर 12 छोटे प्रांतों में बांटने की तैयारी चल रही है। सरकार इसे ‘बेहतर शासन और विकास’ का नाम दे रही है, जबकि विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक इसे ब्रिटिश शासन की पुरानी रणनीति ‘बांटो और राज करो’ का आधुनिक संस्करण बता रहे हैं।

फेडरल कम्युनिकेशंस मिनिस्टर अब्दुल अलीम खान ने 8 दिसंबर को इस योजना के पक्ष में बयान देते हुए कहा कि छोटे प्रांत बनाना प्रशासन को आसान बनाएगा और विकास की गति तेज करेगा। हालांकि आलोचक इस योजना को असल में मुनीर की सत्ता मजबूत करने की चाल मान रहे हैं। उनका कहना है कि छोटे प्रांत बनाकर सेना और केंद्र सरकार की पकड़ मजबूत होगी, लेकिन इससे अल्पसंख्यक और अलगाववादी समूहों में विद्रोह की आग और भड़क सकती है।

विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान में इस योजना का विरोध तेज़ है। सिंध, पाकिस्तान का आर्थिक केंद्र और कराची का घर, पहले से ही अलगाववाद की आग में जल रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने इस योजना को ‘सिंध की साजिश’ बताया है। स्थानीय लोग इसे ‘अंतिम धक्का’ मान रहे हैं और कराची बंद की धमकियां भी सामने आई हैं। अगर योजना लागू होती है, तो सिंध में बड़े पैमाने पर विरोध और हिंसा फैलने की आशंका है।

बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध है, लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है, पहले से ही विद्रोह की आग में जल रहा है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे अलगाववादी संगठन चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) परियोजनाओं पर हमले कर रहे हैं। अप्रैल 2025 में मुनीर ने बलूच विद्रोहियों पर ‘भारत की साजिश’ होने का आरोप लगाया था, लेकिन स्थानीय लोग इसे सेना की क्रूरता मानते हैं।

गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) में भी पहले से ही अशांति है। यहां राजनीतिक बहिष्कार, जमीन हड़पने के प्रयास और बिजली कटौती के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। नवंबर 2025 में गिलगित-बाल्टिस्तान में बड़े प्रदर्शन हुए, जिनमें कराकोरम हाईवे भी ब्लॉक हुआ। मानवाधिकार संगठन जबरन गायब किए जाने और विरोधियों की आवाज दबाने की शिकायतें कर रहे हैं।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी चरमरा चुकी है। देश का कर्ज लगभग 73 अरब डॉलर है और महंगाई चरम पर है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि मुनीर की सख्ती और इस योजना से लोकतंत्र कमजोर होगा। छोटे प्रांतों में अलगाववाद और विद्रोह तेज हो सकता है। आलोचक कह रहे हैं कि यह योजना विद्रोह दबाने का हथियार हो सकती है, लेकिन 1971 की तरह इससे बिखराव और संभावित गृहयुद्ध का खतरा भी पैदा हो सकता है।

सोशल मीडिया पर भी विरोध तेज़ है। #FreeSindh और #BalochistanIsNotPakistan जैसे हेशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। ये संकेत देते हैं कि जनता अपने अधिकारों और प्रादेशिक अखंडता को लेकर गुस्सा और नाराजगी जता रही है। पाकिस्तान के नागरिकों में यह चिंता भी बढ़ रही है कि अगर छोटे प्रांत बनाने की योजना लागू हुई, तो देश के कई हिस्सों में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।

मुनीर का कहना है कि उनकी योजना का उद्देश्य पाकिस्तान की अखंडता की रक्षा करना है। लेकिन सड़कों पर लोगों की आवाज़, विरोध और आंदोलन इसे चुनौती दे रहे हैं। विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक इस योजना को देश में नई उथल-पुथल और विभाजन की दहलीज पर खड़ा मान रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ सकता है, खासकर अमेरिका और चीन से। दोनों देशों की नजर पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिरता और CPEC परियोजनाओं पर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की आंतरिक परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं। सिंध, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में अलगाववाद पहले से सक्रिय है। अगर छोटे प्रांत बनाने की योजना लागू हुई, तो इन क्षेत्रों में विद्रोह और भड़केगा। इससे ना केवल सेना और केंद्र की सत्ता मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय लोगों में असंतोष और विरोध की आग और तेज़ होगी।

वर्तमान स्थिति पाकिस्तान के भविष्य के लिए गंभीर संकेत दे रही है। विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि अगर मुनीर की योजना लागू हुई, तो यह केवल प्रशासन सुधार का कदम नहीं बल्कि देश में नई राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल की शुरुआत हो सकती है।