Stir in Bihar politics: बिहार की सियासत में हलचल फिर हुई तेज
बिहार की राजनीति एक बार फिर हलचल के दौर से गुजर रही है. विधानसभा चुनावों के बाद शांत दिख रहे राजनीतिक माहौल में रविवार को केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान के बयान ने नई खलबली मचा दी. चिराग पासवान ने दावा किया है कि विपक्षी महागठबंधन के कई विधायक सत्तारूढ़ एनडीए के संपर्क में हैं. इस बयान ने प्रदेश में नए राजनीतिक समीकरणों की संभावनाओं को हवा दे दी है.
चिराग पासवान ने यह टिप्पणी उस समय की जब पत्रकारों ने उनसे एक सवाल पूछा. सवाल का संबंध उन अफवाहों से था, जिनमें दावा किया जा रहा है कि हाल में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के कम से कम चार विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) के संपर्क में हैं. कांग्रेस ने इस चुनाव में कुल छह सीटों पर जीत हासिल की है.
इन अफवाहों को लेकर जब चिराग पासवान की प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने सीधे-सीधे किसी पार्टी या विधायक का नाम तो नहीं लिया, लेकिन यह अवश्य कहा कि कई विपक्षी विधायक एनडीए के संपर्क में हैं और वे किसी न किसी कारण से सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ जुड़ने के इच्छुक हैं.
चिराग पासवान ने कहा कि ये विधायक मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वे जनता की बेहतर ढंग से सेवा कर सकते हैं. इस बयान ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है, क्योंकि बिहार विधानसभा में पहले से ही एनडीए का भारी बहुमत है और ऐसे में विपक्षी विधायकों के ruling गठबंधन में शामिल होने की संभावनाओं पर सवाल उठने लगे हैं.
चिराग पासवान ने विपक्ष पर हमला जारी रखते हुए कहा कि जनता का भरोसा विपक्ष से उठ रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष न तो रचनात्मक राजनीति करता है और न ही सरकार को काम करने देता है. चिराग ने आरोप लगाया कि संसद के हर सत्र में विपक्ष केवल शोर-शराबा करता है और आने वाला 1 दिसंबर से शुरू होने वाला शीतकालीन सत्र भी इससे अलग नहीं होगा.
चिराग के अनुसार, राज्य विधानसभा का सत्र भी जल्द शुरू होने वाला है और वहां भी विपक्ष हंगामे की ही राजनीति करेगा. उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह विपक्ष को दबाव में लाने की रणनीति है या सच में किसी बड़े राजनीतिक फेरबदल की तैयारी.
इस बीच कांग्रेस ने चिराग पासवान के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि हर चुनाव के बाद इस तरह की अफवाहें उड़ाई जाती हैं. उन्होंने याद दिलाया कि 2020 में भी ऐसी ही बातें फैलाई गई थीं, लेकिन तब कांग्रेस के सभी 19 विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे थे.
राजेश राम ने कहा कि कांग्रेस विधायक पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और पार्टी छोड़ने की कोई गुंजाइश नहीं है. कांग्रेस का यह बयान साफ करता है कि वह चिराग पासवान के दावे को केवल एक राजनीतिक प्रचार मानती है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार की राजनीति में कई बार अचानक बदलाव देखने को मिले हैं और नेता व विधायक पाला बदलते भी रहे हैं. हालांकि, इस बार स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है. ऐसे में विपक्षी विधायकों के एनडीए में आने से सत्ता समीकरणों में कोई बहुत बड़ा बदलाव तो नहीं होगा, लेकिन इससे विपक्ष की पहले से कमजोर स्थिति और भी कमजोर हो सकती है.
महागठबंधन की हालत पहले ही खराब है. कांग्रेस को जहां केवल छह सीटें मिली हैं वहीं उसके सहयोगी दल भी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन नहीं कर सके. आरजेडी भी सत्ता में वापसी का सपना पूरा नहीं कर पाई. ऐसे में विपक्षी खेमे में मनोबल गिरा हुआ है. इस पृष्ठभूमि में चिराग पासवान का दावा एक नए तरह की राजनीतिक हलचल को जन्म दे रहा है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर विपक्ष के कुछ विधायक वास्तव में एनडीए के संपर्क में हैं तो यह आने वाले समय में बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है.

