शिमला की संजौली मस्जिद पर फिर भड़का विवादशिमला की संजौली मस्जिद पर फिर भड़का विवाद

शिमला की संजौली मस्जिद पर फिर भड़का विवाद

 

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संजौली मस्जिद को लेकर तनाव दोबारा बढ़ गया है। मस्जिद को अवैध करार दिए जाने के बाद से लगातार विवाद जारी है, और अब हिंदू संगठनों ने नमाज रुकवाने की खुली तैयारी शुरू कर दी है

देवभूमि संघर्ष समिति ने आवाह्न किया है कि, इलाके में तनाव को देखते हुए लोग अपने बच्चों को घरों में ही रखें। समिति के दो पदाधिकारी पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं और उनकी स्थिति बिगड़ने के बाद एक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

अनशनकारियों की मांग है कि, जिस मस्जिद को कोर्ट ने अवैध घोषित किया है, उसका बिजली और पानी तुरंत काटा जाए। साथ ही, 14 नवंबर को दर्ज की गई FIR को वापस लिया जाए।

WhatsApp Image 2025 11 21 at 2.09.28 PM

ये वही FIR है, जो उस समय दर्ज हुई थी, जब समिति के कार्यकर्ताओं ने बाहरी राज्यों से आए मुस्लिमों को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोक दिया था। संजौली मस्जिद को लेकर ये विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि पिछले साल से इसका माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है

31 अगस्त 2024 को शिमला के मैहली इलाके में दो गुटों के बीच लड़ाई हुई। झगड़े के बाद एक समुदाय के कुछ लोग संजौली मस्जिद में जाकर छिप गए। इसके बाद 1 सितंबर को गुस्साए लोग मस्जिद के बाहर इकट्ठा हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

ये विरोध धीरे-धीरे पूरे शहर और फिर प्रदेश के अन्य हिस्सों में फैल गया। 11 सितंबर को एक बार फिर संजौली में बड़ा प्रदर्शन हुआ। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस को बल प्रयोग और पानी की बौछार तक करनी पड़ी। इसके बाद हिंदू संगठनों के तेवर और भी कड़े हो गए और मस्जिद को तोड़ने की मांग शुरू हो गई।

विवाद बढ़ता देख संजौली मस्जिद कमेटी खुद कोर्ट पहुंची और 12 सितंबर 2024 को नगर निगम के समक्ष मस्जिद के अवैध हिस्से को हटाने की पेशकश की। जिससे कुछ समय के लिए माहौल शांत हो गया।

फिर 5 अक्टूबर 2024 को नगर निगम आयुक्त ने मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिलें गिराने का आदेश दिया, जिसके बाद दो मंजिलें ढहा दी गईं।मगर इस वर्ष यानी 2025 में मामला फिर गर्म हो गया।

3 मई 2025 को निगम आयुक्त ने पूरी मस्जिद को ही अवैध बताते हुए पूरा ढांचा गिराने के आदेश जारी कर दिए। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन 30 अक्टूबर 2025 को जिला अदालत ने भी निगम आयुक्त के फैसले को सही ठहराया।

अदालती फैसला आने के बाद भी मस्जिद अभी खड़ी है और इसी वजह से तनाव लगातार बना हुआ है।

14 नवंबर 2025 को मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने पहुंचे, लेकिन देवभूमि संघर्ष समिति के सदस्यों ने बाहरी राज्यों से आए मुस्लिमों को अंदर जाने से रोक दिया।

इस दौरान बहस हुई और पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने, तनाव फैलाने और उकसाने के आरोप में छह लोगों पर FIR दर्ज की। इन्हीं में तीन महिलाएं भी शामिल हैं।
FIR दर्ज होने के बाद हिंदू संगठनों का गुस्सा भड़क गया।

उनका कहना है कि, जब अदालत ने मस्जिद को अवैध घोषित कर दिया है, तब वहां नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

इन घटनाओं के बाद दो पदाधिकारी चार दिन से अनशन पर बैठे हैं। शुक्रवार को विजय शर्मा नामक अनशनकारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें IGMC अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों ने बताया कि उनकी स्थिति कमजोर थी, इसलिए मेडिकल निगरानी जरूरी थी। इस बीच जिला प्रशासन और देवभूमि संघर्ष समिति के बीच बातचीत चल रही है।
वहीं, सूत्रों के अनुसार, प्रशासन मौखिक रूप से आश्वासन दे चुका है कि, उनकी मांगों पर कार्रवाई होगी, लेकिन समिति लिखित आश्वासन चाहती है।

जब तक लिखित भरोसा नहीं दिया जाता, प्रदर्शन जारी रखने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं और हालात पूरी तरह नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। बच्चों को घरों से न निकालने की अपील भी की गई है, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।