CM सुखविंदर सुक्खू शिमला से दिल्ली हुए रवाना
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शनिवार को शिमला से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। सुक्खू की ये दिल्ली यात्रा पार्टी हाईकमान से कांग्रेस संगठन और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चर्चा के लिए मानी जा रही है।
राज्य में कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति और संगठन निर्माण की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा व्याप्त है। प्रदेश कांग्रेस में संगठन की स्थिति पिछले एक साल से अस्तव्यस्त रही है।
पार्टी कार्यालय में लंबे समय से सन्नाटा पसरा है और कोई नई गतिविधियां नहीं चल रही हैं। पिछले साल 6 नवंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्य, जिला और ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारिणी भंग कर दी थी।
उसके बाद कई नेताओं ने संगठन और अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए अनुरोध किया, लेकिन अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया।

हालांकि, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने हाल ही में दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष पद के छह दावेदारों के इंटरव्यू किए हैं, लेकिन निर्णय अभी तक लंबित है। सुक्खू दिल्ली में पार्टी हाईकमान से मिलकर जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी और संगठन निर्माण पर जोर दे सकते हैं।
ये कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमाचल में दिसंबर-जनवरी में पंचायत और नगर निकाय चुनाव होने हैं।
इसके साथ ही सुक्खू उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भी भाग लेंगे। ये बैठक 17 नवंबर को फरीदाबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी।
बैठक में हिमाचल प्रदेश के बीबीएमबी के बकाया 4000 करोड़ रुपये से अधिक के एरियर का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद बीबीएमबी अब तक हिमाचल को उसका बकाया राशि नहीं दे रहा है। CM सुक्खू गृह मंत्री से इस मुद्दे को प्राथमिकता से हल कराने की मांग कर सकते हैं।
साथ ही, बैठक में हिमाचल को शानन प्रोजेक्ट का स्वामित्व वापस दिलाने का भी मुद्दा उठ सकता है। पंजाब सरकार ने परियोजना की 100 साल की लीज पूरी होने के बाद भी इसे हिमाचल को सौंपने से इनकार किया है। CM सुक्खू इस मसले पर भी केंद्र सरकार से समर्थन मांग सकते हैं।
उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में सिर्फ हिमाचल ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और चंडीगढ़ के उपराज्यपाल/प्रशासक और मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।
बैठक में आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, क्षेत्रीय विकास, कानून व्यवस्था और अंतरराज्यीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा, राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और केंद्र सरकार के उच्च अधिकारी भी बैठक में हिस्सा लेंगे।
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, सुक्खू की ये दिल्ली यात्रा हिमाचल कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। अगर हाईकमान अध्यक्ष और संगठन का फैसला जल्दी करता है, तो दिसंबर-जनवरी में होने वाले चुनावों में पार्टी की रणनीति स्पष्ट और मजबूत रहेगी।
वहीं, अगर ये प्रक्रिया लंबित रही, तो कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नेता असंतुष्ट रह सकते हैं।
सुक्खू की दिल्ली यात्रा और उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक दोनों ही हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह यात्रा न सिर्फ राजनीतिक संगठन और नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की वित्तीय और विकास परियोजनाओं के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है।

