हर साल 15 नवंबर को देश अपने उन नायकों को याद करता है, जिन्होंने न सिर्फ आजादी के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि जनजातीय समाज की अस्मिता और अधिकारों को नए आयाम दिए। बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाने वाला ‘जनजातीय गौरव दिवस’ अब एक ऐसी परंपरा बन गया है, जहां आदिवासी समाज के रणबांकुरों और नये प्रतिभावान चेहरों को राष्ट्रव्यापी मंच मिलता है। वहीं, मध्य प्रदेश के जबलपुर और आलीराजपुर में हुए आयोजनों की चर्चा इसीलिए अहम है… क्योंकि यहां जनजातीय समाज की उपलब्धियों और गौरवशाली धरोहर को सरकार ने सम्मान और प्रोत्साहन के साथ प्रस्तुत किया गया…
जबलपुर में आयोजित मुख्य समारोह की शुरुआत राज्यपाल मंगू भाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी रही… इस बार चर्चा में रहीं महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप विजेता टीम की सदस्य और छतरपुर जिले के घुवारा की निवासी क्रांति गौड़, जिन्हें उनके शानदार प्रदर्शन और आदिवासी समाज की बेटी होने के लिए मंच पर खास सम्मान मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें एक करोड़ रुपये का चेक दिया… जो न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे आदिवासी समाज के लिए गौरव की बात रही।
क्रांति गौड़ ने महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में अपने शानदार गेंदबाजी से भारत को गौरवान्वित किया…9 विकेट लेकर उन्होंने इन स्पर्धाओं में अद्वितीय भूमिका निभाई थी। ये सम्मान उस सोच का प्रतीक है, जिसमें आदिवासी समाज की बेटियां भी देश के हर मोर्चे पर उत्कृष्टता दिखा सकती हैं।
समारोह की खास बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल जुड़ना रहा। उन्होंने क्रांति गौड़ का देश के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया। पीएम ने कहा, “क्रांति गौड़ जनजातीय समाज की बेटी ने वर्ल्ड कप में देश के लिए अहम विकेट लिए हैं, ये हर जनजातीय परिवार के लिए प्रेरणा है।”
कार्यक्रम में आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह ने कलाकारों के साथ ढोल बजाकर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी ये प्रस्तुति सांस्कृतिक धरोहर को देश के सामने रखने की पहल थी। आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत नृत्य, संगीत और लोकनाट्य के रूप में सदियों से देश की विविधता में अपना रंग भरती आई है।
ये उत्सव सिर्फ सम्मान ही नहीं, बल्कि जनजातीय समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाता है, जहां सामूहिकता और गर्व का भाव प्रकट होता है।
इस मौके पर सरकार ने “शालिनी एप” का उद्घाटन भी किया… इस एप के माध्यम से जनजातीय वर्ग को सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलेगी… ये डिजिटल पहल, शासन की जनजातीय हितैषी नीतियों और उनकी पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आदिवासी समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक कल्याण संबंधित योजनाओं को अब क्लिक में ही जान पाना empowerment की ओर संकेत है।
जनजातीय गौरव दिवस के तहत आलीराजपुर में हुए कार्यक्रम भी बड़े पैमाने पर देखे गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेताजी बिरसा मुंडा और छीतू सिंह किराड़ की प्रतिमाओं का लोकार्पण किया। यहां आदिवासी नायकों के योगदान पर विस्तृत चर्चा हुई।
बिरसा मुंडा को आदिवासी आंदोलनों का सर्वोच्च नेता माना जाता है। उनका जीवन स्वतंत्रता, सामाजिक जागृति और आत्मसम्मान की प्रेरणा है। वहीं छीतू सिंह किराड़ का नाम किंवदंती बनकर आया है। मुख्यमंत्री ने बताया “छीतू सिंह किराड़ ने 1882 में अंग्रेजों के खिलाफ 7000 आदिवासी भाइयों-बहनों की सेना बनाकर लड़ाई लड़ी थी… लेकिन दुर्भाग्य से कांग्रेस ने कभी उनको सम्मान नहीं दिया।”
आदिवासी समाज के ऐसे नायक जिनकी गाथा अमूमन उपेक्षा के अंधेरे में थी, जनजातीय गौरव दिवस ने उनको राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना भी की। उन्होंने कहा, “बिहार को कांग्रेस ने वोट के अधिकार को लेकर बदनाम किया, कल कांग्रेस को जोरदार झाड़ू लगी है। जनता चाहती है, राजकुमार यानी राहुल गांधी को घर भेजना पड़ेगा, पप्पू की चप्पू-टप्पू सब बंद होने वाली है।”
ये वक्तव्य, जनजातीय समाज के सशक्तिकरण के साथ-साथ राजनीति में बदलाव के संकेत के रूप में सामने आया, जहां जनता ने बदलती सोच और नए नेतृत्व को पसंद किया है।
जनजातीय गौरव दिवस सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि ये आत्मसम्मान और अस्मिता का उत्सव है। बरसों तक आदिवासी समाज अपने अधिकारों, अपनी संस्कृति और संघर्षों के लिए जूझता रहा। लेकिन बिरसा मुंडा, छीतू सिंह जैसे नायकों की याद और क्रांति गौड़ जैसी युवा प्रतिभाओं के सम्मान ने अब जनजातीय समाज को नए आत्मविश्वास से भर दिया है।
आज सरकारी योजनाओं, डिजिटल पहल और युवाओं को खेलकूद, शिक्षा समेत नवाचार में आगे लाने का प्रयास जनजातीय समाज की धारा को मुख्यधारा की ओर ले जा रहा है। “शालिनी एप” जैसी पहल उन्हें हर सुविधा और जानकारी अपने मोबाइल के माध्यम से दे रही है।
जनजातीय गौरव दिवस 2025 निश्चित तौर पर आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा और सम्मान का पर्व रहा। इस दिन की समग्र सोच विश्व कप विजेता क्रांति गौड़ का सम्मान, बिरसा मुंडा-छीतू सिंह किराड़ की स्मृति, आदिवासी सांस्कृतिक उत्सव, और डिजिटल empowerment न सिर्फ आज बल्कि आने वाले वर्षों के लिए आदिवासी समाज को ऊंचाइयों तक पहुंचाने की आधारशिला बनेंगी।

