OP Rajbhar spoke on Baba Bageshwar: कुशीनगर में बाबा बागेश्वर की यात्रा पर बोले ओपी राजभरOP Rajbhar spoke on Baba Bageshwar: कुशीनगर में बाबा बागेश्वर की यात्रा पर बोले ओपी राजभर

OP Rajbhar spoke on Baba Bageshwar: कुशीनगर में बाबा बागेश्वर की यात्रा पर बोले ओपी राजभर

उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री और सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कुशीनगर में बड़ा बयान देकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। बिहार से अपने राजनीतिक दौरे से लौटते वक्त उन्होंने बिहार चुनावी माहौल से लेकर बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री की “हिंदू जागृति पदयात्रा” तक पर खुलकर अपनी राय रखी। राजभर ने कहा कि देश में पहले से ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हिंदू हैं, ऐसे में “हिंदू जागृति” की पदयात्रा का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

कुशीनगर पहुंचने पर एनएच-28 के किनारे भगवान बुद्ध निर्वाण स्थली के मुख्य द्वार पर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान सुभासपा के रामकोला से पूर्व विधायक रामानंद बौद्ध सहित स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे। मीडिया से बातचीत के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने साधु-संतों की राजनीति में बढ़ती दखल को लेकर तीखा बयान दिया।

उन्होंने कहा, “जिस देश में राष्ट्रपति हिंदू, प्रधानमंत्री हिंदू और मुख्यमंत्री हिंदू हैं, वहां आखिर दिक्कत किस बात की है? ये साधु-महात्मा लोग सिर्फ नेतागिरी में आने के लिए इतना ड्रामा कर रहे हैं। जो भी थोड़ा फेमस होता है, वह राजनीति में कदम रखने की तैयारी करता दिखता है।”

राजभर ने धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा पर तंज कसते हुए कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था — “पॉलिटिकल पावर इज द की ऑफ सक्सेस।” आज वही बात ये साधु-संत भी समझ चुके हैं। उनके अनुसार, “ये लोग पहले खुद को संत बताते हैं, फिर प्रसिद्धि पाने के बाद किसी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा बन जाते हैं। और फिर चिन्मयानंद भारती जी या साक्षी महाराज की तरह सांसद बन जाते हैं।”

पंचायती राज मंत्री ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में “हिंदू जागृति पदयात्रा” की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां किसी को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में 25 करोड़ की आबादी है। बताइए यहां किसको खतरा है? बुलडोजर टनाटन तैयार है। जो ठिनकने की कोशिश करते हैं, उनके लिए जेल भी तैयार है। यहां कानून-व्यवस्था मजबूत है और किसी को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।”

राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों के नाम पर राजनीति का माहौल बनाना समाज के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जनता महंगाई, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा चाहती है, तब नेताओं और संतों को राजनीति की पिच पर उतरना लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है।

बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने अपनी राजनीतिक राय रखते हुए कहा कि इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। उन्होंने कहा, “मैंने कुछ दिन पहले गूगल पर पढ़ा कि जब-जब बिहार में ज्यादा मतदान हुआ है, तब-तब आरजेडी की जीत हुई है। अगर इस बार 60 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग होती है, तो इसका फायदा फिर आरजेडी को मिल सकता है।”

राजभर ने बिहार की सियासत को “घाचपेच भरी राजनीति” बताया। उन्होंने कहा कि वहां हर दल एक-दूसरे के खिलाफ है। “ओवैसी आरजेडी के खिलाफ हैं, पीके (प्रशांत किशोर) सबके खिलाफ हैं। ऐसे में साफ तौर पर कहना मुश्किल है कि इस बार कौन बाजी मारेगा। फिलहाल जनता चुप है, और बिहार की जनता जब तक खुलकर बोलती नहीं, तब तक कोई दावा करना गलत होगा।”

बिहार चुनाव में नेताओं के बढ़ते बयानों पर भी ओम प्रकाश राजभर ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “नेता तो भाषण देने का काम करते हैं। कोई एक दिन में सरकार पलटने की बात करता है, तो कोई अपनी लहर चलने का दावा करता है। लेकिन सच्चाई यह है कि जनता ही असली मालिक है। वही तय करती है कि कौन जीरो बनेगा और कौन हीरो।”

उन्होंने आगे कहा कि देश में राजनीति का स्वरूप बदल चुका है। अब सिर्फ जाति या धर्म के नाम पर चुनाव जीतना आसान नहीं रहा। जनता अब विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर सोच रही है। राजभर ने कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों की जनता बहुत समझदार है और अब पुराने नारों से बहकने वाली नहीं।

पंचायती राज मंत्री ने अपने दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन को मजबूत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सुभासपा अब सिर्फ पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में पार्टी देश के कई राज्यों में अपने संगठन का विस्तार करेगी।

कुशीनगर में स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद राजभर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ग्राम पंचायतों को अधिक सशक्त बनाना और गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत किए बिना लोकतंत्र की जड़ें मजबूत नहीं हो सकतीं।