उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में साइबर ठगों ने ठगी का ऐसा जाल बुना है जिससे शहर के लोगों को डिजिटल सुरक्षा का डर सताने लगा है। ताजा मामला चिरंजीव विहार निवासी 75 साल की महिला को ठगों ने अपना शिकार बनाया। ठगों ने महिला को “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर मानसिक दबाव में डालकर ₹52.78 लाख रुपये ठग लिए।
ठगी की कैसे हुई शुरुआत ?
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 25 अक्टूबर को उदय ठाकुर को एक व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को टेलीकॉम विभाग का कर्मचारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। इसी आधार पर अपराधियों ने पीड़िता को डराते हुए कहा कि मामला गंभीर है और अब जांच क्राइम ब्रांच और सीबीआई कर रही है।
बता दें कि, कुछ देर बाद महिला को कथित रूप से इन एजेंसियों के ‘अधिकारियों’ से वीडियो कॉल पर जोड़ा गया। वीडियो कॉल पर अपराधियों ने सरकारी पहचान-पत्र और कार्यालय का नकली माहौल दिखाकर विश्वास दिलाया कि वे केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी हैं। उन्होंने महिला को “डिजिटल अरेस्ट” की अवधारणा समझाई यानि वह घर से बाहर नहीं जा सकतीं और बैंक खाते की जांच के लिए सहयोग देना होगा।
आपको बता दें कि, महिला से ठगों ने 25 अक्टूबर से 1 नवंबर 2025 तक मानसिक रूप से नियंत्रित रखा। इस दौरान उन्होंने तीन अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹52.78 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। प्रत्येक लेनदेन से पहले उन्होंने महिला को झूठे कानूनी परिणामों का भय दिखाया और बैंक अधिकारियों से बात करने से भी मना किया।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही साइबर क्राइम थाने, गाजियाबाद में मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कॉल डिटेल्स, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल्स की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। गाजियाबाद के पुलिस अधीक्षक (सिटी) ने बताया, “यह ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी नई तकनीक पर आधारित ठगी है, जिसमें अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण कर पीड़ित को डराकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराते हैं। मामले की जांच साइबर सेल की विशेषज्ञ टीम कर रही है और जल्द ही अपराधियों की पहचान की जाएगी।”
